अमर उजाला फाउंडेशन एवं बाल चित्र समिति की ओर से बृहस्पतिवार को बाल फिल्म महोत्सव का नगर के दो कॉलेजों तथा गांव भैंसा में आयोजन किया गया। इसमें छात्र-छात्राओं और ग्रामीण अंचल की महिलाओं ने जागरूकता आधारित फिल्म देखकर सीख ली। अमर उजाला के इस प्रयास को सभी ने सराहा।
फलावदा रोड स्थित कृषक इंटर कॉलेज में सुबह नौ बजे अमर उजाला फाउंडेशन एवं बाल चित्र समिति की ओर से बाल फिल्म महोत्सव का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ कॉलेज के प्रधानाचार्य देवेंद्र कुमार एवं शिक्षक नेता नरेशपाल, प्रसोत कुमार ने फीता काटकर किया। अमर उजाला की ओर से प्रधानाचार्य को बुके देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद कॉलेज की छात्र-छात्राओं एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं ने छू लेंगे आसमान फिल्म देखी। फिल्म में मुख्य किरदार निभाने वाली एक छात्रा विकलांग होने के बावजूद अपने हौसलों में कमी नहीं आने देती और बचपन से पहाड़ पर चढ़ने के सपने को पूरा करने के लिए फिल्म के अंत में साथियों के साथ सफलता प्राप्त करती है। छात्राओं ने सराहना करते हुए कहा कि यह फिल्म उन्हें सीख देती है कि कैसी भी मुश्किल घड़ी हो, लेकिन हार नहीं माननी चाहिए। इसके बाद नगर के एएस इंटर कॉलेज में करामाती कोट फिल्म का आयोजन किया गया। यहां एसडीएम अंकुर श्रीवास्तव एवं कॉलेज प्रधानाचार्य अशोक कुमार ने फीता काटकर बाल फिल्म महोत्सव का शुभारंभ किया। इस फिल्म में उस बच्चे की कहानी दिखाई है जो अपने बहन-बहनोई के साथ रहता है परंतु उसका बहनोई उससे अच्छा बर्ताव नहीं करता और घर से निकाल देता है। सड़क पर ठंड में ठिठुरते देख एक वृद्धा उस बच्चे को कोट देती है। उसकी जेब से हाथ डालने पर एक रुपये का सिक्का निकलता है। बच्चा अपना शौक पूरा करने के लिए जेब से सिक्का निकालता है परंतु इसकी कुछ लोगों को भनक लग जाती है। वे उसकी जान के दुश्मन बन जाते हैं। प्रधानाचार्य अशोक कुमार ने बताया कि इस फिल्म से बच्चों को सीख मिली कि कभी भी अपने मन की बात लालची व्यक्ति को नहीं बतानी चाहिए। ऐसा करने पर कभी-कभी जान पर बन आती है। इसके बाद गांव भैंसा में फिल्म का आयोजन किया गया। प्रधान श्रीमती उमेश व विलयम सिंह ने फीता काटकर बाल फिल्म महोत्सव का शुभारंभ किया। यहां अमर उजाला फाउंडेशन एवं बाल चित्र समिति की ओर से गांव में छुटकन की महाभारत फिल्म का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में महिलाओं की भीड़ एकत्रित हुई। फिल्म में एक बच्चे की कहानी दिखाई जाती है। बच्चा जो सपने में देखता है वह हकीकत में बदल जाता है। यहां जुहा, जिया, अरुण, अरविंद, चंद्रप्रताप, नीरज, राजेंद्र, पूनम आदि का सहयोग रहा।
अमर उजाला का यह प्रयास काफी सराहनीय है। इस तरह के आयोजन से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। -अलिशा, छात्रा
कभी लालच नहीं करना चाहिए और न ही अपने मन की बात को जगजाहिर करना चाहिए। अमर उजाला द्वारा दिखाई गई फिल्म जागरूकता से भरी है। -नीलिमा, छात्रा
समय-समय पर इस तरह के आयोजन होते रहे तो मानसिक विकास होता है और बहुत कुछ सीखने को मिलता है। -शिवयांशी, छात्रा
अमर उजाला फाउंडेशन एवं बाल चित्र समिति का बेहतर प्रयास है। इससे बच्चों एवं महिलाओं को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। मनोरंजन के साथ-साथ फिल्म के माध्यम से छात्र-छात्रा जागरुक होंगे।-शिक्षक डॉ. मेघराज सिंह