निगम अधिकारियों की शह पर चल रहा है अवैध होर्डिंग और यूनीपोेल का कारोबार। निगम अधिकारी निगम के हित के बजाय ठेकेदारों के इशारे पर काम कर रहे हैं। जो ठेका एक अप्रैल का जारी होना चाहिए था। ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए अब तक जारी ही नहीं किया गया है। ठेकेदार अवैध होर्डिंग के सहारे चार करोड़ सलाना का कारोबार कर रहे हैं। ठेके की राशि के रूप में मात्र निगम इनसे साठ लाख के आसपास ही ले पाता है। करीब साढे़ तीन करोड़ का फटका हर साल निगम को लग जाता है। इस बार की बात करें तो ठेका ना होने पर निगम को मिलने वाली ये रकम भी खटाई में पड़ गई है।
नहीं किया अनुबंध
महानगर की सड़क, भवन आदि स्थानों पर होर्डिंग लगाने का ठेका छोड़ा जाता है। उसके बाद ही कोई ठेकेदार शहर में होर्डिंग लगाकर प्रचार कर सकता है। 31 मार्च को होर्डिंग ठेकेदारों का वार्षिक ठेका खत्म हो गया। आठ-दस ठेकेदारों ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए होर्डिंग का ठेका लेने को निगम में आवेदन किए। पौने तीन माह बीतने को हैं, लेकिन अभी तक नगर निगम प्रशासन ने ठेकेदारों से अनुबंध नहीं किया है। जबकि ठेकेदारों ने एक अप्रैल से ही पूरे शहर में होर्डिंग और यूनीपोल लगा दिये हैं।
बीओटी के नाम पर अवैध होर्डिंग का कारोबार
महानगर के मुख्य मार्गों पर बीओटी के नाम पर अवैध होर्डिंग का कारोबार दो साल से फलफूल रहा है। निगम अनुबंध के तहत बीओटी ठेकेदार को 26 स्थानों पर स्ट्रीट लाइट के खंभे पर डायरेक्शन बोर्ड के कुछ हिस्से पर 30 गुना 40 का एक विज्ञापन पट लगाकर प्रचार प्रसार करने की अनुमति दी गई थी। लेकिन ठेकेदार ने जहां डायरेक्शन बोर्ड का स्वरूप बदलकर यूनीपोल लगाकर होर्डिंग पर प्रचार प्रसार कर दिया। वहीं 26 के स्थान पर 120 यूनिपोल खड़े कर दिए।
निगम के पास कोई रिकार्ड ही नहीं, कितने होर्डिंग
यूनिपोल और छतों पर लगे होर्डिंग गिरने से कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन नगर निगम प्रशासन ने यूनिपोल में कोई बदलाव नहीं किया। एल ब्लॉक तिराहा पर यूनिपोल गिरने से एक व्यक्ति की जान चली गई थी। इसी प्रकार तेजगढ़ी चौराहा के निकट यूनिपोल गिरने से युवक ने जान से हाथ धोया था। इतना ही नहीं इंदिरा चौक के निकट होर्डिंग गिरने से एक युवक घायल हो गया था। इसके बाद भी नगर निगम प्रशासन ने ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। सोमवार को अवैध होर्डिंग लगाते समय करंट आने से एक युवक की जान चली गई। ये होर्डिंग भी अवैध था। निगम के पास कोई रिकार्ड नहीं है कि कहां कहां होर्डिंग लगे हैं या लगने चाहिएं। होर्डिंग लगाने के कोई मानक भी अभी तक नहीं बनाए गए हैं।
25 जून तक अवैध होर्डिंग को है छूट
निगम के होर्डिंग प्रभारी राजेश कुमार का कहना है कि जिन ठेकेदारों ने पंजीकरण के लिए निगम में आवेदन किए थे, उनकी फाइलें तत्कालीन नगरायुक्त के सम्मुख प्रस्तुत की गई थी। उन्होंने पंजीकरण को स्वीकृति नहीं दी थी। अब अधिक से अधिक होर्डिंग ठेकेदार पंजीकृत हों इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण खोले गए हैं। 25 जून के बाद निस्तारण किया जाएगा। जो ठेकेदार प्रचार प्रसार कर रहे हैं उनसे पूरे एक साल का पैसा जमा कराया जाएगा। बीओटी ठेके का विवाद न्यायालय में चल रहा है।