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हितों का टकराव, अखाड़ा बनी कैंट बोर्ड बैठक

Sat, 11 Jun 2016 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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कैँट बोर्ड में बैठक - फोटो : अमर उजाला
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 कैंट बोर्ड बैठक में शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। 12 घंटे चली मैराथन बैठक में पार्षद और सीईओ आमने-सामने रहे। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। उपाध्यक्ष ने बैठक की वैधानिकता पर ही सवाल उठा दिए। बोर्ड अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद बैठक शुरू तो हुई, लेकिन पार्षदों ने दो-तीन एजेंडों को छोड़कर किसी पर सहमति नहीं जताई। विरोध के चलते सभी तरह के पेमेंटों पर रोक लगा दी गई है। भुगतान संबंधी कई फाइलें फाइनेंस कमेटी को भेजी जाएंगी। पार्षदों के तेवर देख सांसद बीच बैठक से ही उठकर चले गए थे।
कैंट बोर्ड की बैठक हमेशा से ही शांति से संपन्न होती है। कभी कोई विवाद नहीं हुआ। लेकिन शुक्रवार का नजारा अलग था। कैंट बोर्ड ने पूर्वाह्न 11 बजे विशेष बोर्ड बैठक बुलाई थी, जो रात 11 बजे तक चलती रही।  बैठक का एजेंडा सभी पार्षदों को पहले ही भेजा जा चुका था। बंगला नंबर 210 बी, बंगला 167 का मुद्दा भी शामिल किया गया था। बोर्ड अध्यक्ष मेजर जनरल के. मनमीत सिंह, सांसद राजेंद्र अग्रवाल समय पर कैंट बोर्ड कार्यालय पहुंच गए।
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धीरे-धीरे अन्य मनोनीत सदस्य, उपाध्यक्ष समेत पार्षद भी कैंट बोर्ड कार्यालय पहुंच गए। बैठक शुरू होने से पहले ही उपाध्यक्ष बीना वाधवा, पार्षद विपिन सोढ़ी समेत अन्य पार्षदों ने एक पत्र अध्यक्ष को सौंपा। इसमें बैठक की वैधानिकता पर सवाल पूछा गया था। पार्षदों ने सीईओ से पूछा कि यह सामान्य बैठक है या विशेष बैठक। उनका तर्क था कि 27 मई को सामान्य बैठक बुलाई थी तो अब यह विशेष बैठक कैसे बन गई।
सीईओ ने पार्षदों को समझाया कि 27 मई को आयोजित बैठक में कोरम पूरा न होने से वह स्थगित हो गई थी। अध्यक्ष के निर्देश पर 10 जून को विशेष बैठक बुलाई है। सीईओ की बात से पार्षद संतुष्ट नहीं हुए। करीब डेढ़ घंटे तक पार्षद और सीईओ में बहस होती रही। हंगामे को देख सीईओ ने बैठक स्थगित करने की भी बात कह डाली। बोर्ड अध्यक्ष ने पार्षदों से कहा कि या तो बैठक चलने दें या स्थगित कर दें। अध्यक्ष ने कहा कि सदस्य राजनीति तो करें, लेकिन जनता के हित की।
करीब 12:30 बजे बैठक शुरू हुई। एजेंडे के पहले मुद्दे से ही पार्षदों ने विरोध शुरू कर दिया। पार्षद विपिन सोढ़ी ने कहा कि इस तरह मुद्दे पास नहीं हो सकते, इन्हें फाइनेंस कमेटी में भेजा जाए। जहां उनकी पूरी तरह से जांच होने के बाद ही बोर्ड मुहर लगाएगा। बैठक में कर्नल सुबोध गर्ग, कर्नल एके  वेद, ले. कर्नल अतुल पुठिया, राजेश त्यागी, रिनी जैन, बुशरा कमाल, नीरज राठौर, अनिल  जैन, मंजू गोयल, धर्मेंद्र सोनकर मौजूद रहे।

ये नहीं आए
पदेन सदस्य ब्रिगेडियर जेएस बिश्नोई, मनोनीत सदस्य गौरव वर्मा, विशेष आमंत्रित सांसद मुनकाद अली, कैंट विधायक सत्य प्रकाश अग्रवाल।

जनता के बहाने अहम की लड़ाई
अहम के चलते सीईओ और पार्षद आमने-सामने थे। हर मुद्दे पर बहस हुई। सीईओ ने साफ कहा कि सभी काम कैंट बोर्ड के नियमानुसार किए जाएंगे। सीईओ ने जैसे ही पेमेंट करने का मुद्दा उठाया तो पार्षदों ने इसपर भी आपत्ति लगा दी। पार्षद विपिन सोढी, अनिल जैन ने कहा कि जब तक कोई भी पेमेंट संबंधित मुद्दा फाइनेंस कमेटी और बोर्ड में पास नहीं होता है तब तक किसी का भी पेमेंट नहीं किया जाए। सीईओ ने कहा कि संविदा कर्मचारी भी इसी दायरे में आते हैं, ऐसे में कर्मचारियों का वेतन नहीं रोका जा सकता। इसपर पार्षदों ने कहा कि वेतन को छोड़कर बाकी सभी पेमेंट रोके दिए जाएं।
 

‘210 बी को नहीं तोड़ा जाए’
पार्षदों ने कहा कि बंगला 210 बी को नहीं तोड़ा जाए। उन्होंने तर्क रखा कि यहां पर बहुत से लोग रहते हैं। सीईओ ने कहा कि तोड़ने का फैसला कोर्ट का है। कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई होगी। जिन कब्जेदारों को नोटिस नहीं दिए गए हैं, जल्द ही उन्हें भी नोटिस भेजे जाएंगे। पार्षदों ने 167 का मुद्दा भी उठाया।

सीईई का मामला गर्माया
पार्षदों ने सीईई अनुज सिंह को बर्खास्त करने की मांग की। उन्होंने बताया कि सीईई पर कई गंभीर आरोप लगे हैं। सीईओ राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि मैं आपके कहने भर से किसी को नहीं हटा सकता हूं। अधिवक्ता की सलाह लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कई मुद्दों पर लंबी बहस
बैठक में बंगला नंबर 210 बी, 167 फाइनेंस के कई मामले, अतिक्रमण पर लंबी बहस हुई। पार्षद एक से डेढ़ घंटे तक बहस करते रहे। पहली बार बैठक में लंच तक मंगवाया गया। 2:45 से 3 बजे तक लंच चला।
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इन पर बनी बात
बैठक में काफी कम मामलों पर बात बनी। अवैध निर्माण के 20 मामलों पर चर्चा हुई। सहमति बनी कि 15 को नोटिस भेजा जाएगा और 5 की जांच होगी। साथ ही लीगल लाइसेंस और ट्रेंड लाइसेंस रिन्यू करने पर सहमति बनी।
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