जहरीली होती जा रही हिंडन नदी के उद्धार के लिए अनूठी पहल शुरू की गई है। शनिवार को मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने इसका आगाज करते हुए कहा कि गांधीवादी तरीके से जनता को भी बताया जाएगा कि हिंडन के प्रदूषित होने से लोगों को क्या नुकसान है। इस बाबत निर्मल हिंडन फंड का गठन कर दिया गया।
मंडलायुक्त ने कहा कि हर सूरत में हिंडन को प्रदूषण से मुक्त करना है। इसके लिए नदियों में विसर्जित वेस्ट के बॉयो केमिकल की जांच का काम 31 जुलाई तक पूरा हो जाएगा। इस मुहिम में ग्राम वासियों, प्रधानों, प्राईवेट-पब्लिक सेक्टरों का सहयोग लेने, बेसलाइन सर्वे कराने, नदियों के किनारे पौधरोपण करने व जिलास्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने के अलावा गांव की जलप्रबंधन समितियों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। सीवेज, सॉलिड वेस्ट, औद्योगिक अपशिष्ट आदि के संबंध में आधारभूत सर्वे कराया जाएगा।
इसे जनांदोलन बनाएंगे
मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि इस अभियान से जनता को जोड़ना होगा। नदी के निकटवर्ती क्षेत्र में नगरीय ठोस अपशिष्ट की डंपिंग नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए जनता को भी जागरूक करना होगा कि यदि कहीं ऐसा हो रहा है तो उसका विरोध करें। अन्य लोग जो इस प्रकार सीवेज गिराते है उनके खिलाफ सीआरपीसी की धारा 133 में कार्यवाही की जाए।
एमडीए में कोष का गठन
निर्मल हिंडन फंड मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) कार्यालय में शुरू किया गया है, जिसमें एक करोड़ एमडीए, पांच करोड़ रुपये गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) जमा करा रहा है। इसके अलावा इस पूरी मुहिम के लिए लिये टाटा, कोका कोला ट्रस्ट आदि सीएसआर फंड, नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस अथॉरिटी से मदद जाएगी। वहीं व्यापारी, समाज सेवी, ग्राम प्रधान, अधिकारी, मीडिया आदि सभी का सहयोग लिया जाएगा। सभी के साथ कार्यशाला होगी। सरकारी कर्मचारियों अधिकारियों से भी आह्वान किया जाएगा कि वे एक एक दिन का वेतन इसमें दें।
छत्तीसगढ़ के मॉडल पर काम
कूड़ा निस्तारण के लिए छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में चल रहे प्लांट की तर्ज पर काम होगा। मंडलायुक्त के मुताबिक यह संस्थान कूड़े को अलग-अलग कर देता है और जिसका जैसा प्रयोग होता है उसे उसी काम में लिया जाता है। कंपोस्ट खाद बनाने पर काम होगा। मेरठ की बड़ी समस्या गोबर भी है। इसका भी निस्तारण यही कंपनी कर सकेगी। 26 जुलाई को इस बाबत प्रजेंटेशन होगा।
हर शनिवार हिंडन डे
हर शनिवार को अब हिंडन डे मनाया जाएगा। इस दिन हिंडन मुक्ति के अभियान पर काम होगा। नीति बनेगी। नमामि गंगे प्रोजेक्ट में बात हुई है। सीवर ट्रीटमेंट के लिए 2144 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। मेरठ और सहारनपुर दोनों मंडल इस पर खास काम करेंगे।
मेरठ के नाले और सहयोगी नदियों का प्रदूषण कम होगा
मेरठ का आबू नाला, ओडियन नाला, काली नदी आदि में लोग कूड़ा ना डालें, इस पर उन्हें जागरूक किया जाएगा। हिंडन की अन्य सहयोगी नदियों को भी साफ किया जाएगा ताकि हिंडन तक कूड़ा न जाए। हिंडन में शुद्घ पानी छोड़ा जाएगा। इस मौके पर अधीक्षण अभियंता सिंचाई एचएन सिंह ने बताया कि हिंडन व उसकी सहायक नदियों को पचास स्थानाें पर मॉनीटर किया जा रहा है। इस दौरान नीर फाउंडेशन के रमन त्यागी आदि मौजूद रहे।