फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेरठ में दिखी सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल, हिंदू भाई के निधन पर मुस्लिम समाज ने उठाई अंतिम संस्कार की हर जिम्मेदारी

Tue, 28 Apr 2020 08:19 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
मुस्लिम समाज ने उठाई अंतिम संस्कार की हर जिम्मेदारी - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

मुस्लिमों के कंधे पर हिंदू भाई की अर्थी। राम नाम सत्य के साथ चल रही शव यात्रा। मंगलवार को कौमी एकता के मिसाल की यह तस्वीर कई सांप्रदायिक दंगे देख चुके मेरठ शहर के लिए किसी सुखद आश्चर्य से कम नहीं थी। लॉकडाउन और पवित्र रमजान माह का यह पैगाम देर तक रहेगा और दूर तक जाएगा। 

विज्ञापन


शाहपीरगेट स्थित कायस्थ धर्मशाला में नीचे भगवान चित्रगुप्त का ऐतिहासिक मंदिर है। धर्मशाला के प्रथम तल पर मंदिर के पुजारी रमेशचंद माथुर (68) परिवार के साथ रहते थे। काफी समय से वह बीमार चल रहे थे। मंगलवार दोपहर करीब दो बजे उनका निधन हो गया। घर पर पत्नी रेखा माथुर और छोटा बेटा चंद्रमौलि थे। बड़ बेटा दिल्ली में था। लॉकडाउन के चलते पहुंच नहीं सका। अर्थी को चार कंधों की जरूरत थी। ऐसे में शाहपीरगेट के मुस्लिम आगे आए और अंतिम संस्कार से पहले की रस्में पूरी कराने के साथ अर्थी को कंधा भी दिया।

सूरजकुंड श्मशान घाट तक पैदल ले गए अर्थी
शाहपीर गेट कायस्थ धर्मशाला से सूरजकुंड श्मशान घाट करीब 2.5 किमी. है। कुछ लोगों ने सूरजकुंड से शव वाहन मंगाने के लिए कहा। लेकिन मुस्लिम भाइयों ने कहा कि चाचा को तो हम पैदल ही लेकर जाऐंगे। पार्थिव शरीर को अपने कंधों से श्मशान घाट पहुंचाया। रास्ते में जिसने भी यह दृश्य देखा, हैरान रह गया। कौमी एकता की इस मिसाल को देखकर तारीफ करने से नहीं रोक सके।

विज्ञापन
विज्ञापन

क्षेत्रीय निवासी अकील अंसारी ने मुस्लिम समाज के साथ कराई अंतिम संस्कार की व्यवस्था - फोटो : amar ujala
छोटे बेटे चन्द्रमोली ने दी चिता को मुखाग्नि
बड़े बेटे कमल माथुर की तबीयत खराब होने के कारण 4 दिन पहले ही दिल्ली गए थे। ऐसे में दोपहर बाद अनुमति मिलना कठिन था। जिसके बाद छोटे बेटे चंद्रमौलि माथुर ने चिता को मुखाग्नि दी। पड़ोसी आकिल अंसारी ने ही क्रियाकर्म के लिए जरूरी सामान जुटाया।

आकिल ने बताया वह रमेशचंद को बड़ा भाई मानते थे। आसपास के सभी लोग और बच्चे पूरे परिवार का सम्मान करते हैं। दोस्त राजीव शर्मा ने बताया रमेशचंद की माता और उनकी बेटी का अंतिम संस्कार भी मुस्लिमों ने कराया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें