पहले हिंदी भवन जाने वाले रास्ते में डेयरी संचालित होती थी, जिसे कोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने हटवाया था। आज भी यहां की खाली जमीन पर कबाड़ियों ने सामान डाल रखा है। अब सिर्फ द्वार पर लगे साइन बोर्ड से ही पता चलता है कि यहां कभी हिंदी भवन हुआ करता था।
कभी पांच हजार किताबें थी मौजूद
पुरुषोत्तम दास टंडन हिंदी भवन में हिंदी साहित्य की करीब पांच हजार किताबें मौजूद थीं। छात्र पीएचडी के लिए न केवल यहां की किताबों का सहारा लेते थे, बल्कि हिंदी साहित्यकारों द्वारा बैठकों के साथ यहां हिंदी साहित्य को बढ़ावा देने के लिए काव्य गोष्ठियां भी आयोजित की जाती थीं।
इसके अलावा इस यहां हिंदी के मेधावी छात्रों को सम्मानित किया जाता था। तुलसी जयंती पर भी कार्यक्रम आयोजित होता था। इस भवन के परिसर में कार्यालय के अतिरिक्त एक बड़ी लाइब्रेरी, शौचालय के साथ कर्मचारियोें का कक्ष भी था।
नया हिंदी भवन बनेगा, डिजिटल लाइब्रेरी बनगी
हिंदी भवन की समिति के सचिव दिनेशचंद जैन ने बताया कि पुराना भवन खंडहर में तब्दील हो गया है। यहां से मलबा हटवा दिया गया है। कुछ लोगों ने खाली मैदान में सामान डाल कर रखा है। नगर निगम दूध की डेयरी को पहले ही हटवा चुका है।
अब यहां पर नया आधुनिक हिंदी भवन बनाने की तैयारी है, जिसमें डिजिटल लाइब्रेरी भी होगी। इसका मानचित्र मेरठ विकास प्राधिकरण से पास होते ही नए हिंदी भवन का निर्माण शुरू कराया जाएगा।