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Hindi Diwas: नए अवसरों का सृजन होगा तो नई पीढ़ी का बढ़ेगा रुझान, विश्व में बढ़ेगी धमक -प्रो. नवीन चंद्र लोहनी

Wed, 14 Sep 2022 11:46 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ के चौधरी चरणसिंह विश्विद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं कला संकाय के अध्यक्ष प्रो. नवीन चंद्र लोहनी का मानना है कि हिंदी में रोजगार की संभावनाएं बड़े रूप में उपलब्ध नहीं हैं। यही तथ्य हिंदी के बढ़ने और उसके पिछड़ने में सबसे अधिक उत्तरदायी है।
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प्रो. नवीन चंद्र लोहनी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिंदी के आगे बढ़ने और उसके पिछड़ने में कोई बात उत्तरदायी है तो वह हिंदी से मिलने वाला रोजगार है। हिंदी भाषा और हिंदी साहित्य अध्ययन में प्रतिवर्ष लाखों विद्यार्थी प्रवेश लेते हैं। इसका लाभ उन्हें शिक्षण व्यवसाय में मिलता है। जब भी हिंदी से जुड़े रोजगार की चर्चा होती है तो उसमें मीडिया एवं अनुवाद के कार्य भी जोड़ लिए जाते हैं। ये हिंदी की प्रयोजनमूलक क्षेत्र की विधाएं हैं। इनमें रोजगार के नए क्षेत्र विकसित हुए हैं।

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यह सर्वमान्य तथ्य है कि हिंदी अगर रोजगार देने के मामले में पिछड़ रही है तो इसका कारण है कि ज्ञान और सूचना के जितने भी माध्यम हैं वहां हिंदी को प्रमुखता से अभी तक नहीं लाया जा सका है। न्याय, विधि, तकनीकी, भाषा शिक्षण जहां रोजगार की पर्याप्त संभावनाएं हैं वहां हिंदी अभी बहुत पीछे है।

हिंदी महीना, पखवाड़ा, सप्ताह, दिवस मनाते समय कहा जाता है कि हिंदी सात समंदर पार पहुंच गई है।  इसका एक दूसरा पक्ष यह भी है कि हिंदी में रोजगार की संभावनाएं बड़े रूप में उपलब्ध नहीं हैं। देश की वरिष्ठ प्रशासनिक सेवाओं और अन्य राजकीय सेवाओं में, हिंदी माध्यम वालों को रोजगार अपेक्षाकृत कम मिल रहा है।
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स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं में आए सोशल मीडिया के नए रूप ने भी हिंदी को कुछ काम दिया है। मीडिया में प्रस्तुति के क्षेत्र को छोड़ दें तो उससे जुड़े अधिकांश कार्य अंग्रेजी में हो रहे हैं। शिक्षण माध्यम के रूप में हिंदी काफी पीछे है। प्राथमिक स्कूलों में, पब्लिक स्कूलों में अंग्रेजी का प्रचलन बढ़ा है। इसमें बदलाव हिंदी को रोजगार से जोड़कर ही आ सकता है।

भारत के उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय ही नहीं जिला स्तरीय न्यायालय में भी अंग्रेजी का बोलबाला काफी है। तकनीकी के क्षेत्र में हिंदी में अभी रोजगार के अवसर कम हैं। हिंदी जब तक ज्ञान-विज्ञान, तकनीक, शिक्षण माध्यम, विधि, रोजगार सहित अन्य सरकारी, गैर सरकारी व्यवस्थाओं का हिस्सा नहीं बनेगी तब तक बात नहीं बनेगी।

निजी व्यवसाय तथा निजी कार्यों में भी अधिकांश कार्य अंग्रेजी माध्यम में ही चल रहा है। इसलिए हिंदी माध्यम की वकालत या हिंदी माध्यम की बात करना खुशी तो देता है, किंतु रोजगार के हिस्से में हिंदी को जिस रूप में बढ़ना चाहिए था, वह अभी शेष है। चिंता की बात है कि फिलहाल ऐसी कोई नीति भी नहीं दिखाई देती जिसके माध्यम से हिंदी में रोजगार बढ़ने के अवसर दिख रहे हों। इसके लिए जरूरी है कि गंभीर मंथन हो और  अमल की दिशा में कदम बढ़ाए जाएं। उम्मीद है कि इस हिंदी दिवस पर हम गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ेंगे। (लेखक सीसीएसयू के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं कला संकाय के अध्यक्ष हैं)

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हिंदी हैं हम अभियान : स्वरचित कविता भेजने का आज अंतिम दिन
आजादी के अमृत महोत्सव और हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में देशभक्ति पर आधारित स्वरचित कविता लिखकर अमर उजाला को भेजें। 14 सितंबर (बुधवार) कविता भेजने का अंतिम दिन है। इसके बाद भेजी गईं कविताएं शामिल नहीं की जाएंगी।

नीचे दिए गए क्यूआर कोड पर स्कैन करें। आप नीचे दिए गए लिंक पर कागज पर कविता लिखकर अपलोड कर सकते हैं या फिर आप पोस्टकार्ड के जरिये कविता अमर उजाला कार्यालय 164/1, मोहकमपुर, दिल्ली रोड मेरठ के पते पर भी भेज सकते हैं।

आज स्वचरित कविता भेजने का अंतिम दिन है। इसके बाद भेजी गईं कविताओं को शामिल नहीं किया जाएगा। सर्वश्रेष्ठ तीन कविताओं को अमर उजाला समाचार पत्र में प्रकाशित किया जाएगा। अतिरिक्त दस कविता लिखने वाले छात्र-छात्राओं के नाम प्रकाशित किए जाएंगे।

इस लिंक पर करें क्लिक
https://forms.gle/CvTGc1PXDKX3iQh7A
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