रियो ओलंपिक के बाद जहां पूरे देश में महिला सशक्तिकरण की साख बढ़ी है तो एक और सफलता ने इसमें चार चांद लगा दिए हैं। पर्वतारोही तूलिका रानी ने 16 अगस्त को हिमाचल प्रदेश की स्पिति घाटी की सबसे ऊंची चोटी माउंट कनामो पर तिरंगा फहराकर एक और सफलता दर्ज कर ली। तूलिका ने अपनी इस सफलता पर ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ का आभार जताया है।
बृहस्पतिवार को लौटीं तूलिका ने ‘अमर उजाला’ के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कनामो पर चढ़ाई करने के लिए पर्वतारोहियों को पहले अपने शरीर को उसकी ऊंचाई के प्रभाव को झेलने के लिए तैयार करना पड़ता है। वह बताती हैं कि 19600 फीट की ऊंचाई के साथ कनामो का रास्ता छोटी बजरी से ढका है जिसके कारण फिसलते रहते हैं। घंटो तक लगातार चढ़ाई करते समय तेज हवाएं और कड़ाके की ठंड चुनौती होती है।
आठ दिन का समय लगा
तूलिका के अनुसार कनामो की इस चढ़ाई में आठ दिन का समय लगा। यह अभियान टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन के एक दल के साथ बछेंद्रीपाल के नेतृत्व में किया। वह हमेशा से मेरी प्रेरणा रही हैं। उनके साथ अभियान करना गौरव का विषय है।
तिरंगे को सलामी गौरवपूर्ण क्षण
तूलिका ने उत्साहित होते हुए बताया कि अभियान का सबसे रोमांचक पल 16 हजार फीट की ऊंचाई पर तिरंगे को सलामी देते हुए स्वतंत्रता दिवस मनाना रहा। उसके अगले ही दिन हम चोटी पर तिरंगा लहरा रहे थे।
तूलिका प्रथम महिला
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वालीं तूलिका उत्तर प्रदेश की प्रथम महिला हैं। जबकि ईरान में स्थित एशिया के सबसे ऊंचे ज्वालामुखी माउंट दामावांद पर आरोहण करने वालीं प्रथम व एकमात्र भारतीय महिला हैं। इनके अलावा वह भारत, नेपाल, भूटान, अफ्रीका और रशिया में अभी तक 12 पर्वतारोहण अभियान कर चुकी हैं। वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर पर से सेवानिवृत्त तूलिका अब पर्वतारोहण में जुटी हैं। अगला लक्ष्य नेपाल में स्थित 27 हजार फीट ऊंची मोटी माउंट छो ओयू है। जो डेथ एरिया कहलाता है। अभी तक किसी भारतीय महिला ने इस दुर्गम चोटी का आरोहण नहीं किया है।
‘अमर उजाला’ का आभार
महिला सशक्तिकरण की दृढ़ पैरोकार तूलिका कहती हैं कि महिलाएं हर क्षेत्र में ऊंचाइयों को छू सकती हैं। सिर्फ उन्हें अवसर प्रदान करने की आवश्यकता है। ओलंपिक में साक्षी और सिंधु की जीत यही दर्शाती है। ‘अमर उजाला’ का आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि मेरे पर्वतारोहण के जुनून को कायम रखने में ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ का बहुत सहयोग रहा है। मैं इसके लिए अमर उजाला और फाउंडेशन की बहुत आभारी हूं।