जिन कर्मचारियों की ड्यूटी जनता को मच्छरों से निजात दिलाने की है, वे सीएमओ और अन्य अफसरों की सुख सुविधाओं को पूरा करने में लगे हैं। कोई अफसर की किचन संभाल रहा है तो कोई शहर में फॉगिंग करने के बजाय माली की ड्यूटी निभा रहा है। यह हाल तो तब है, जबकि शासन से स्पष्ट आदेश हो चुके हैं कि स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट खत्म कर दिया गया है। लेकिन उसके बावजूद मलेरिया विभाग ने मुख्यालय को नो अटैचमेंट का झूठा शपथपत्र भेज दिया। इसकी पोल भी विभाग के उपस्थिति रजिस्टर ने खोल दी, जिसमें छह कर्मचारियों की संबद्धता सीएमओ कार्यालय या आवास में दिखाई जा रही है।
यह है प्रकरण
बीते माह शासन स्तर से सभी जिलों को निर्देश हुए थे कि तत्काल प्रभाव से स्टाफ की संबद्धता खत्म की जाती है। उसके बाद स्वास्थ्य मुख्यालय ने जिला स्तर से ऐसे स्टाफ का ब्यौरा मांगा जो संबद्धता पर सेवारत हो। मुख्यालय के अधीन आने वाले हर विभाग से स्टाफ की मूल तैनाती, संबद्धता की स्थिति व वेतन निकलने का स्थान पूछा गया। क्योंकि मुख्यालय को पता था कि जिला स्तर पर अटैचमेंट का बड़ा खेल है, इसलिए विस्तृत ब्यौरा मांगा गया। लेकिन नगर मलेरिया विभाग उसमें भी खेल कर गया। उसने रिपोर्ट में कहा कि हमारे यहां का कोई भी स्टाफ अटैचमेंट पर नहीं है। क्योंकि रिपोर्ट में दिए गए ब्यौरे में सभी स्टाफ की तैनाती, तनख्वाह जारी होने का स्थान और मूल तैनाती नगर मलेरिया विभाग जिला चिकित्सालय दिखाई गई।
इसलिए खत्म हुआ अटैचमेंट
पब्लिक तक चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित कराने और स्वास्थ्य केंद्रों की हालत दुरुस्त करने के लिए शासन ने हर स्तर का अटैचमेंट खत्म किया था। इसके लिए सभी विभागों से इस आशय का शपथ पत्र भी मांगा गया। लेकिन नगर मलेरिया विभाग ने झूठा शपथ पत्र मुख्यालय को दे दिया, जबकि कार्यालय का बड़ा स्टाफ सीएमओ दफ्तर व आवास से संबद्ध है। वहीं, सीएमओ दफ्तर से लेकर पीएचसी, सीएचसी का करीब 50 से अधिक लोगों का स्टाफ संबद्धता पर चल रहा है, जिसको लेकर आज तक सीएमओ दफ्तर मुख्यालय को शपथ पत्र नहीं दे पाया है।
खुद के खेल में फंसा विभाग
नगर मलेरिया विभाग झूठी रिपोर्ट भेजकर अपने आला अफसरों की सुख सुविधाओं में कमी नहीं करना चाहता था। क्योंकि मलेरिया विभाग का बड़ा स्टाफ सीएमओ आवास और दफ्तर में तैनात है। कोई माली है तो कई रसोई का काम संभाल रहा है। शासन ने उन्हें मच्छर मारने के लिए छिड़काव करने व फील्ड का सर्वे करने के लिए नियुक्त किया है, जिसके नाम पर वो हर महीने सैलरी पाते हैं। लेकिन यहां पर उच्च अधिकारियों की सेवा हो रही है। रिपोर्ट में भले ही मुख्यालय को गुमराह किया जा रहा हो। लेकिन विभाग का उपस्थिति रजिस्टर सारी पोल खोल देता है। छह कर्मचारियों के नाम दर्ज हैं और उनके सामने उपस्थिति के तौर पर हस्ताक्षर नहीं होते हैं, बल्कि स्पष्ट तौर पर लिखा गया है ‘सीएमओ एवं सीएमओ दफ्तर’। साफ है कि उनकी सेवा असल मायने में सीएमओ दफ्तर में चल रही है। आलम यह है कि शासन ने सीएमओ को अलग से अर्दली दिया है लेकिन मलेरिया विभाग का फील्ड कर्मचारी मनधारी सीएमओ का अर्दली है जिसका नाम रजिस्टर में सबसे ऊपर लिखा है।
ये हैं सीएमओ दफ्तर से संबद्ध
रामस्वरूप, विक्रम, पूरण, सचिन, जितेंद्र, मनधारी
यहां वार्ड ब्वॉय का क्या काम
सीएमओ ऑफिस में वार्ड ब्वॉय का क्या काम है, वो भी ऐसे समय में जब पीएचसी व सीएचसी पर वार्ड ब्वॉय की कमी है। लेकिन फिर भी चार वार्ड ब्वॉय यहां संबद्ध हैं। इसके साथ पीएचसी, सीएचसी और सीएमओ दफ्तर में फार्मेसिस्ट व वार्ड ब्वॉय बड़ी संख्या में संबद्ध किए गए हैं। 50 लोगों का स्टाफ सीधे तौर पर इन्हीं तीनों जगहों पर संबद्ध किया गया है।
तो हटा लेंगे संबद्ध स्टाफ
मैंने अभी दो-चार महीने पहले ही कार्यालय में ज्वाइन किया है। रिपोर्ट मेरी तरफ से भेजी गई है। लेकिन मुझे लगा कि स्टाफ इस तरह से दूसरे कार्यालय पर काम कर सकता है। अगर पूरी तरह से संबद्धता खत्म करने की बात है तो तत्काल सीएमओ दफ्तर से स्टाफ हटा लिया जागा। बृहस्पतिवार को सारा रिकॉर्ड देखने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. सुधीर गुप्ता, नगर मलेरिया अधिकारी