गंगानगर। मवाना रोड स्थित कसेरूखेड़ा नाले का पुल मानो अब जाम का स्थायी पता बन चुका है। सुबह और शाम का समय आते ही हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि गंगानगर का माहौल किसी बड़े शहर की घंटों लंबी जाम वाली सड़कों की याद दिलाने लगता है। बुधवार को तो स्थिति और भी भयावह हो गई। डेयरी फार्म से लेकर कसेरूबक्सर टेंपो स्टैंड तक वाहनों की सर्पिल कतारें दिखाई दीं। लोग घंटों तक कार, बाइक, बसों के बीच कैद होकर रह गए। इन हालात में प्रशासन एक बार फिर बेबस दिखा।
कसेरूखेड़ा नाले का पुल अब गंगानगर का संकट चौराहा कहलाने लगा है। मेरठ की ओर से आने वाले वाहन इनर रिंग रोड पर मुड़ते हैं, जबकि दूसरी ओर से आने वाले वाहन मेरठ की ओर रुख करते हैं। दोनों दिशाओं में सड़क पार करने की मजबूरी पुल को जाम का सबसे खतरनाक पॉइंट बना देती है। बुधवार शाम भी यही हुआ। जाम की खबर जैसे ही पुलिस अधिकारियों तक पहुंची, एसएसपी विपिन ताडा और एसपी ट्रैफिक राघवेंद्र मिश्रा किसी तरह जाम के बीच से निकलते हुए मौके पर पहुंचे।
जाम में फंसे वाहनों को निकालने के लिए पुलिसकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। एसएसपी ने गंगानगर थाना पुलिस को सख्त निर्देश दिए कि हर दिन शाम 5 बजे से यहां भारी फोर्स तैनात रहे। साथ ही नाला चौड़ीकरण में लगी देरी को लेकर पीडब्ल्यूडी से भी बात करने की बात कही। करीब 20 मिनट तक मौके पर रहकर स्थिति का जायजा लेने के बाद एसएसपी लौट गए और एसपी ट्रैफिक को वहीं तैनात कर दिया गया।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एसएसपी ने तत्काल अतिरिक्त बैरियर मंगवाने का आदेश दिया। पहले से लगे 15 बैरियरों के अलावा नए बैरियर लाकर कसेरूखेड़ा मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने की कोशिश की गई लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब तात्कालिक उपाय हैं, असली समाधान नहीं। लोगों की मांग है कि चौराहे से अतिक्रमण हटाकर गोलचक्कर बनाया जाए, ट्रैफिक लाइट लगाई जाए और एक प्रशिक्षित ट्रैफिक टीम यहां स्थायी रूप से तैनात की जाए।
गंगानगर शहर का पॉश इलाका
गंगानगर शहर का पॉश इलाका माना जाता है। सांसद अरुण गोविल, एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज, राज्य मंत्री दिनेश खटीक सहित कई बड़े नेताओं के आवास यही हैं। क्षेत्र में 14 अस्पताल, 10 बैंक, 8 पब्लिक स्कूल, एक यूनिवर्सिटी, पांच डिग्री कॉलेज, बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, रेस्टोरेंट और बार तक मौजूद हैं। रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही रहती है। ऊपर से NH-34 से गुजरते भारी वाहन यहां की स्थिति और बदतर कर देते हैं।
क्या जाम प्रशासन की पकड़ से बाहर हो चुका है
बड़ा सवाल यह है कि इतनी संवेदनशील और व्यस्त जगह पर ट्रैफिक प्रबंधन का ढांचा आखिर क्यों इतना कमजोर है। लाखों की लागत वाले प्रोजेक्ट चल रहे हैं पर जाम से राहत का कोई ठोस इंतजाम नहीं दिखता। गंगानगर की जनता का धैर्य अब जवाब दे रहा है। लोग पूछने लगे हैं कि क्या गंगानगर का जाम प्रशासन की पकड़ से बाहर हो चुका है ?
मवाना रोड गंगानगर में कसेरुखेड़ा नाले पर लगे जाम की जानकारी पर पहुंचे एसएसपी और एसपी ट्रैफिक, गं