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मेरठ में मैगी को जोर का झटका, पढ़िए कैसे?

Sun, 22 Nov 2015 01:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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सरकार द्वारा रोक हटाए जाने के बाद से मैगी को उत्तर प्रदेश खाद्य एवं औषधि विभाग की तरफ से झटका लगता दिखाई दे रहा है। एफडीए मेरठ की टीम द्वारा मई और जुलाई में भरे गए मैगी के सैंपल फेल हो गए हैं, जिसके बाद संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
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उधर, आईस्क्रीम व अन्य प्रोडेक्ट में फ्लेवर के तौर पर इस्तेमाल होने वाला मैकडोनाल्ड का कोटेड क्रिस्पिस भी विवादों में फंस गया है। जांच के दौरान पाया गया है कि मैकडोनाल्ड द्वारा पैकेजिंग और मैन्यूफेक्चरिंग के नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।

मैगी के सैंपल फेल होने के बाद मई महीने में एफडीए ने सभी जिलों से सैंपलिंग कराने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद एफडीए ने मेरठ से मैगी के चार सैंपल भरे थे, जिसमें चारों तरह की नूडल्स में डाले जाने वाले मसाले का टेस्ट मार्क अधिक पाया गया। नियम के हिसाब से टेस्ट मेकर के अंदर कई सारे तत्व मौजूद होते हैं। जिनका मानक इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च व एफडीए की तरफ से तय किया जाता है।
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लेकिन मैगी के टेस्ट मेकर के अंदर मौजूद कई तत्व मानक से अधिक पाए गए हैं। सैंपल रिपोर्ट में साफ हुआ है कि मैगी के टेस्ट मेकर में जो तत्व एक प्रतिशत होना चाहिए था, वह तीन से सवा चार प्रतिशत तक पाया गया है। सीधे तौर पर कहा जाए तो यह निर्धारित मात्रा से चार तीन गुना अधिक दिया जा रहा था, जो खाने वाले व्यक्ति के डाइजेशन सिस्टम को कई तरह से प्रभावित कर सकता है। पेट में गैस की समस्या समेत जलन व अन्य तरह की बीमारियों को जन्म दे सकता है।

गौरतलब है कि शासन के निर्देश पर एफडीए ने पांच महीने पहले मेरठ से मैगी के डीलरों के यहां से सैंपल भरे गए थे, जिनकी जांच लैब में कराई गई। उधर, मैकडोनाल्ड भी पैकेजिंग के नियमों का उल्लंघन कह रही है, जिसको लेकर एफडीए टीम को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। एफडीए लखनऊ की तरफ से रिपोर्ट मेरठ कार्यालय को प्रेषित कर दी गई है, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।
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