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Meerut News: विश्व सिजोफ्रेनिया दिवस आज

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विश्व सिजोफ्रेनिया दिवस आज
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काल्पनिक दुनिया में रहता है मरीज, भ्रम हो सकते हैं जानलेवा

मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की मानसिक रोग ओपीडी में हर साल आते दो हज़ार से ज़्यादा मरीज़


माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सिजोफ्रेनिया (मनोविदलता), इस मानसिक बीमारी के लक्षण आमतौर पर किशोरावस्था और 20 साल की उम्र में दिखाई देते हैं। दोस्तों और परिवार से खुद को अलग कर लेना, किसी चीज पर फोकस ना कर पाना और चिड़चिड़ापन इसके प्रमुख लक्षण हैं। मरीज एक काल्पनिक दुनिया में रहते हैं। जिंदगी से इनकी दिलचस्पी खत्म हो जाती है। साथ ही मरीज़ के भ्रम जानलेवा भी जो सकते है। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की मानसिक रोग ओपीडी में इन बीमारी के हर साल दो हज़ार से ज़्यादा मरीज़ आते हैं। इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 24 मई को विश्व सिजोफ्रेनिया दिवस मनाया जाता है।
दरअसल,मानसिक रोग होने के बावजूद लोग अक्सर इसका इलाज कराने के बजाय इसे भूत-प्रेत, आत्मा और जादू टोने का असर समझकर झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं। इलाज नहीं कराते। इससे यह बीमारी और बढ़ जाती है। इसमें रोगी को अपने व्यक्तित्व का कुछ पता नहीं रहता। उसके जीवन में न तो खुशी रहती है और न ही गम। उसे अपने खिलाफ साजिश होने की आशंका का डर लगा रहता है। जिस व्यक्ति में भी ये लक्षण हैं उसे तुरंत डॉक्टर से मशविरा लेना चाहिए।
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आमतौर पर सिजोफ्रेनिया के लक्षणों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि सिजोफ्रेनिया कई वजहों से हो सकता है। तनाव और पारिवारिक कारण भी हो सकते हैं। इसके लिए मरीजों को सामान्य तौर पर एंटी साइकोटिक दवाएं दी जाती हैं।
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केस स्टडी
जागृति विहार की रहने वाली 29 वर्षीय महिला को परिजन झाड़-फूंक करा रहे थे, मगर आराम नहीं हो रहा था। परेशान होकर मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में दिखाया तो पता चला सिजोफ्रेनिया बीमारी है। अब महिला का इलाज चल रहा है। उन्हें पहले से काफी आराम है।
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हापुड़ रोड के रहने वाले 43 साल के व्यक्ति को यह भ्रम हो जाने पर कि कोई उसकी हत्या कर देगा, परिजन उस पर जादू या ऊपरी असर समझ रहे थे। उसके गंडे-ताबीज करा रहे थे। आराम न मिलने पर जिला अस्पताल के मनोरोग ओपीडी में दिखाया तो बीमारी का पता चला और इलाज शुरू हुआ।

ये बरतें सावधानियां
-मरीज को कभी अकेला और खाली न छोड़ें
-मरीज से खुल कर बात करें और उसके विचार जानें
-उसे काम में व्यस्त रखें और नए कार्यों के लिए प्रोत्साहित करें
-उसमें हीन भावना न आने दें
-तनाव दूर करने के लिए योग का सहारा लें
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मरीज को लगता है, उसके खिलाफ साजिश हो रही
मेडिकल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण पाल ने बताया कि इस बीमारी में मरीज को अक्सर लगता है कि लोग उसका मजाक बना रहे हैं, उसके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। ओपीडी में मरीज़ों की काफी संख्या में आते हैं।
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झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़ें, बीमारी है इलाज कराएं
वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि राणा ने बताया कि यह मानसिक बीमारी है। इसका इलाज कराएं। झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़ें। मरीज की तबीयत और खराब ना करें।
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जिला अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ कमलेंद्र किशोर ने बताया कि दिमाग के कुछ केमिकल्स इस बीमारी को जन्म देते हैं, जिसकी वजह से सिजोफ्रेनिया के मरीजों में एक तरीके का डिसऑर्डर पैदा हो जाता है। फैमिली हिस्ट्री वालों में ये बीमारी होने की आशंका ज्यादा होती है। ड्रग्स, पुरानी कोई बीमारी या फिर बहुत ज्यादा तनाव भी सिजोफ्रेनिया की तरफ ले जाता है।
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