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महामारी में जारी स्वास्थ्य विभाग की आंकड़ेबाजी

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मेरठ। कोरोना से होने वाली मौत और मरीजों की संख्या में मेरठ स्वास्थ्य विभाग की आंकड़ेबाजी जारी है। शासन के आंकड़ों से मौत और कोरोना मरीजों की संख्या मेरठ स्वास्थ्य विभाग कम दिखा रहा है। रविवार तक 17 लोगों की मौत और 377 मरीजों का फर्क चल रहा था।
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शासन के आंकड़ों में 171 मौत हैं और मेरठ में 154 मौत दिखा रहे हैं। ऐसे ही शासन के आंकड़ों में मेरठ में 6498 मरीज हैं, जबकि मेरठ के आंकड़ों में 6121 मरीज। हालांकि कोरोना मरीजों की छुट्टी ज्यादा दर्शा रहे हैं। मेरठ के आंकड़ों में 4413 हैं, जबकि शासन के आंकड़ों में 4346 हैं। शासन के आंकड़ों में एक्टिव केस 1981 हैं और मेरठ के आंकड़ों में 1554। यह फर्क तब है, जबकि कई बार शासन और स्वास्थ्य विभाग अपने अपने आंकड़े संशोधित कर चुके हैं। प्रदेश में कोरोना से मौत के मामले में मेरठ छठे नंबर पर है। पहले नंबर पर कानपुर नगर (527 मौत) है। दूसरे पर लखनऊ (516), तीसरे पर प्रयागराज (216), चौथे पर वाराणसी (206) और पांचवें पर गोरखपुर (187) है। आंकड़ों की इस बाजीगरी पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए थे कि अब अगर पोर्टल पर गलत आंकड़े डाले तो प्राचार्य और अधीक्षक जिम्मेदार होंगे। सीएमओ डॉॅ. राजकुमार का कहना है कि जब मरीज मिलता है तो उसकी जानकारी पोर्टल पर अपलोड की जाती है। शासन के आंकड़ों में उसे दर्ज कर लिया जाता है, लेकिन जब स्वास्थ्य विभाग उसकी पड़ताल करता है तो कुछ मरीज दूसरे जिलों के निकलते हैं। जिन्हें मेरठ स्वास्थ्य विभाग अपने आंकड़ों में संशोधित कर लेता है। यह संशोधन कई बार पोर्टल पर नहीं हो पाता, जिस कारण यह फर्क नजर आता है।
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