कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTI
कोरोना मरीजों के आंकड़ों में फर्क को लेकर मुख्यमंत्री तक नाराजगी जता चुके हैं, लेकिन मेरठ जिले में आंकड़ेबाजी का खेल खत्म नहीं हो रहा है। मेरठ स्वास्थ्य विभाग शासन के आंकड़ों से मौत कम दिखा रहा है और मरीजों की छुट्टी ज्यादा। बुधवार तक शासन और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में 17 लोगों की मौत और 39 मरीजों का फर्क चल रहा है।
शासन के आंकड़ों में कुल 87 मौत हैं, जबकि मेरठ स्वास्थ्य विभाग 70 बता रहा है। ऐसे ही शासन के आंकड़ों में कुल 1050 मरीज हैं और मेरठ के आंकड़ों में 1011 मरीज। शासन 696 मरीज स्वस्थ होना दिखा रहा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग 701, एक्टिव मरीज शासन के हिसाब से 267 हैं, जबकि स्वस्थ्य विभाग के हिसाब से 240 मरीज। यह फर्क तब है, जब कई बार शासन और स्वास्थ्य विभाग अपने अपने आंकड़े संशोधित कर चुके हैं। प्रदेश में कोरोना से मौत के मामले में मेरठ दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर आगरा (89 मौत) है। मरीजों की संख्या में मेरठ प्रदेश में अब 6वें नंबर पर है। उससे ऊपर गौतमबुद्धनगर, आगरा, कानपुर नगर, लखनऊ और गाजियाबाद हैं।
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आंकड़ों की इस बाजीगरी पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस संबंध में सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि जब मरीज मिलता है तो उसकी जानकारी पोर्टल पर अपलोड की जाती है। शासन के आंकड़ों में उसे दर्ज कर लिया जाता है। जब स्वास्थ्य विभाग पड़ताल करता है तो कुछ मरीज दूसरे जिलों के निकलते हैं। जिन्हें मेरठ स्वास्थ्य विभाग अपने आंकड़ों में संशोधन कर लेता है। यह संशोधन कई बार पोर्टल पर नहीं हो पाता, जिस कारण यह फर्क नजर आता है। आंकड़ों का यह फर्क ऑडिट के बाद सही हो जाएगा। मेरठ स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े सही हैं। स्टेट के आंकड़े भी इसी हिसाब से अपडेट किए जाएंगे। पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए थे कि अब अगर पोर्टल पर गलत आंकड़े डाले तो प्राचार्य और अधीक्षक जिम्मेदार होंगे। सही आंकड़े ही पोर्टल पर डाले जाएं।
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