प्रदेश में अभी न तो नई सरकार का गठन हुआ और न ही विधानसभा चुनाव की आचार संहिता हटी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने नियमों को दरकिनार कर नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत डॉक्टर, फार्मासिस्ट, एएनएम के 200 से ज्यादा पदों को भरने का खेल शुरू कर दिया है। पहले से घपले-घोटालों में बदनाम विभाग ने फिर ऐसा विज्ञापन दे दिया, जिसमें नियुक्तियों पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए त्योहार और सरकारी अवकाशों के बीच महज 48 घंटे का समय दिया गया। जिससे एक और नए घोटाले की सुगबुगाहट है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा आनन-फानन में नियुक्ति की फाइल खोलने की नीयत पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं कि उसने आचार संहिता खत्म होने का भी इंतजार नहीं किया। उससे पहले ही नियुक्ति से जुड़ी शेष प्रक्रिया को शुरू कर दिया। दरअसल 11 मार्च को मतगणना हुई। लेकिन विभाग की तरफ से एक दिन पहले ही तिथि से विज्ञापन जारी कर दिया गया। जिसमें कहा गया कि 5 दिसंबर 2016 को प्रकाशित विज्ञापन के आधार पर संविदा नियुक्ति हेतु प्राप्त समस्त प्रार्थना पत्र 8 मार्च 2017 को मेरठ की राजकीय वेबसाइट एनआईसी पर अपलोड कर दिए गए हैं। अगर किसी को आपत्ति है तो वो 15 मार्च को शाम 4 बजे तक सीएमओ कार्यालय के कमरा नंबर 206 में लिखित तौर पर इसे दर्ज करा सकते हैं।
नियम तो सात कार्य दिवस का है
एकाएक नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया शुरू करने को लेकर कई सवाल हैं। सबसे पहला यही कि आपत्ति दर्ज कराने को स्वास्थ्य विभाग ने सिर्फ 48 घंटे का समय दिया है। क्योंकि विज्ञापन 10 मार्च का है लेकिन वो प्रकाशित 12 मार्च को हुआ है। यानी रविवार के दिन। इसके बाद 13 मार्च की होली के चलते अवकाश था। ऐसे में एक अभ्यर्थी के पास आपत्ति दर्ज कराने के लिए सिर्फ 14 व 15 मार्च का समय है, यानी 24 घंटे का वक्त एक व्यक्ति के पास आपत्ति दर्ज कराने का दिया गया, जो अपने आप में सवाल खड़े करता है कि आखिरकार नियुक्ति को लेकर इतनी जल्दबाजी क्या है। जबकि न्यायालय का भी स्पष्ट नियम है कि आवेदन के लिए न्यूनतम दो सप्ताह और आपत्ति के लिए न्यूनतम सात कार्य दिवस का समय दिया जाना चाहिए।
डीएम ने फाइल कर दी थी वापस
एनएचएम में रुकी भर्ती प्रक्रिया डीएम के निर्देश पर शुरू की गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने विज्ञापन जारी किया था। जिसके बाद विभिन्न पदों पर आवेदन जमा कराए गए थे। लेकिन इसी बीच इंटरव्यू से पहले आचार संहिता लगने पर डीएम ने नियुक्ति संबंधी फाइल स्वास्थ्य विभाग को यह कहकर लौटा दी थी कि आचार संहिता हटने के बाद ही इस फाइल पर आगे काम होगा। बताया गया कि अभी तक विभाग ने डीएम से इसकी परमिशन नहीं ली है।
अभी तो आपत्ति मांग रहे
अभी सिर्फ आपत्ति मांगी जा रही हैं ताकि विभाग में रुके काम पूरे हो सकें। डीएम से सभी परमिशन इंटरव्यू प्रक्रिया से पहले ले ली जाएंगी। हमारी कोशिश निष्पक्षता से भर्ती प्रक्रिया कराने की है। अगर कोई खामी है तो उसे दिखवाएंगे। -डॉ. वीपी सिंह, सीएमओ
यह नियम विरुद्ध
अमूमन किसी भी नियुक्ति प्रक्रिया में प्रदेश भर से आवेदन होते हैं। ऐसे में आपत्ति दर्ज कराने के लिए कम से कम 7 कार्य दिवस का समय देना आवश्यक है। कोर्ट ने भी कई मामलों की सुनवाई में स्पष्ट आदेश दिए हैं। अगर कोई सरकारी संस्था सात कार्यदिवस से कम समय देती है तो वह न्याय हित में नहीं है, जिसे चुनौती दी जा सकती है। -कुलदीप चौहान, अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट