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Meerut News: सिखों की बहादुरी का इतिहास सुनाकर संगत को निहाल किया

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हस्तिनापुर। पंज प्यारे भाई धर्म सिंह की जन्मस्थली सैफपुर गांव में बैसाखी पर्व व खालसा पंथ के 326वें प्रगट दिवस पर श्रद्धालुओं ने पंज प्यारे भाई धर्म सिंह गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेका और पवित्र सरोवर में स्नान कर धर्मलाभ अर्जित किया। कीर्तन दरबार में रागी जत्थों ने शबद कीर्तन कर सिखों की बहादुरी का इतिहास सुनाकर संगत को निहाल किया।
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सिख धर्म के दसवें गुरु गोविंद सिंह द्वारा सन 1699 में खालसा पंथ की सृजना पर स्थापित किए गए पंज प्यारों में दूसरे प्यारे भाई धर्म सिंह के जन्म स्थान गुरुद्वारा साहिब में बैसाखी खालसा पंथ का प्रकट दिवस अत्यंत हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। समारोह में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अखंड पाठ साहिब की संपूर्णता पर पड़े भोग के पश्चात संपन्न हुआ। रागी जत्थों ने वाह वाह गोविंद सिंह आपे गुरु चेला, शुभ करमन ते कबहूं न टारो, निश्चय कर अपनी जीत करो समेत काफी जोशीले शबद किए।
खालसा पंथ की स्थापना, महान बलिदानियों, सिख धर्म के गौरवमयी इतिहास को रचनाओं सहित गायन कर सुनाया। जिसमें दिल्ली, मेरठ, बिजनौर, मुजफ्फरनगर आदि स्थानों से संगत पहुंची। गुरुद्वारा साहिब के संत बचन सिंह ने सभी को धर्म पर चलने की सीख दी और सेवा सिमरन का गुरु उपदेश दिया। रागी जत्थों ने कहा कि श्री गुरु गोविंद सिंह ने दुष्ट शासकों का नाश करने हेतु दलितों, शोषितों को बराबरी का दर्जा देने हेतु ही खालसा पंथ की स्थापना की और बताया कि पंज प्यारे भी अलग-अलग राज्यों तथा जातियों के थे। परंतु गुरु साहिब ने सभी को एक ही पात्र में अमृत छकाकर भेदभाव समाप्त कर दिया। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान किया व लंगर भी ग्रहण किया।
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