बिजनौर। साल 1950 पहले बनी हवेली या महल हेरिटेज होटल में तब्दील किए जाएंगे। पर्यटन विभाग की ओर से कवायद की जा रही है। सरकार की ओर से इसके लिए बाकायदा अनुदान भी दिया जाएगा। फिलहाल निवेशकों की तलाश की जा रही है। डीएम जसजीत कौर ने बताया कि पर्यटन विभाग की ओर से हेरिटेज होटल के लिए योजना का संचालन किया जाना है। जिसके तहत विरासत होटल के लिए जरुरी है कि 1950 से पहले तामीर किए गए पुराने भवन, किले, हवेलियां, कोठियों और महलों में होटल संचालित किए जाने हैं। साथ ही इन्हें हेरिटेज होटल की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इस योजना की खासियत रहेगी कि वास्तुकला संबंधी विशेषताओं में कोई बदलाव भी नहीं होगा।
हेरिटेज होटल के लिए होटल का भवन 1950 से पहले का बना हुआ हो तथा इसमें कम से कम पांच कमरे होना जरुरी है। वहीं हेरिटेज क्लासिक होटल भवन के लिए 1935 से पहले बना होना चाहिए। जिसमें न्यूनतम 15 कमरे अनिवार्य रूप से होने चाहिए। हेरीटेज ग्रैंड होटल का भवन 1920 से पहले का निर्मित होना चाहिए। जिसमें कम से कम 15 कमरे होना जरुरी है। हेरीटेज होम स्टे का भवन 1950 से पहले का बना हुआ होना चाहिए और इसमें कम से कम दो से चार कमरों का संचालन किया जाना जरुरी है। हेरिटेज होटल की योजना के तहत भवन की पुरानी संरचना को प्रभावित किए बिना पूंजीगत लागत पर 25 फीसदी अनुदान मिलेगा। पांच करोड़ तक के बैंक ऋण पर पांच वर्ष की अवधि के लिए पांच फीसदी अनुदान रहेगा। साथ ही स्टांप ड्यूटी तथा भूमि उपयोग बदलाव में 100 फीसदी छूट प्रावधान है।
पहले वर्ष के उत्पाद शुल्क पर 50 फीसदी प्रतिपूर्ति रहेगी। डीएम ने बताया 10 लाख से 10 करोड़ तक निवेश पर 25 फीसदी अनुदान, 50 करोड़ तक 20 फीसदी और 200 करोड़ तक 15 फीसदी अनुदान मिलेगा।