स्थल की जानकारी देते मंहत
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1901 में महात्मा शाहदास ने धर्म प्रचार व देशभक्ति की अटूट प्रेरणा दी थी। 1918 में उनका महाप्रयाण हो गया। 1919 में पनियाला के राजा महात्मा सुमेर सिंह काली कमली वाले ने यहां गुरुकुल की स्थापना की। देश की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने साइमन कमीशन को काले झंडे दिखाए थे। जेल में डाले जाने के बाद उन्होंने 60 दिन अनशन किया।
इसके बाद इस महल के संचालक महात्माजी के शिष्य रामकिशन उर्फ डॉ. स्वामी महंत बने। उन्होंने गुरु परंपरा को जारी रखते हुए आर्य समाज व समाज सुधार के प्रचार-प्रसार में तन, मन, धन से जुड़ गए। 2001 में उनके देहावसान के बाद से उनके शिष्य ब्रह्मचारी महंत भीष्म रमन स्वामी महल की देखरेख करते हैं। भीष्म रमन स्वामी के अनुसार हस्तिनापुर शुरू से ही शासन व्यवस्था का केंद्र रहा।