गुरुद्वारा के बाहर लगा बोर्ड
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गुरु गोविंद सिंह ने सिखों को धर्म की रक्षा और देश की आजादी के लिए प्रेरणा प्रदान की थी। उनके द्वारा जनभावना को परखने के लिए 14 अप्रैल, 1699 को बैसाखी पर आनंदपुर साहिब के विशाल मैदान में सिख समुदाय के लोगों को आमंत्रित किया गया। उनके आह्वान पर हजार सिख इकट्ठे हो गए थे। फिर उन्होंने समस्त लोगों के सामने शीश की मांग की। जिन पांच लोगों ने उनके लिए अपने शीश का बलिदान किया वे पंजप्यारे के नाम से विख्यात हुए।