फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हस्तिनापुर अभ्यारण्य क्षेत्र में भी होता है खुलेआम शिकार

Mon, 01 May 2017 10:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
विज्ञापन
बंदूकें। - फोटो : अमर उजाला ब्यूराो
विज्ञापन
रिटायर्ड कर्नल के बेटे द्वारा वन्य जीवों के शिकार और उनके अंगों की तस्करी का मामला प्रकाश में आने पर तमाम टीमें इसके खुलासे में लगी है। शिकार का यह मामला अकेला नही है। मेरठ के हस्तिनापुर अभ्यारण्य क्षेत्र में भी खुलेआम शिकार होता है।  
विज्ञापन


अमर उजाला ने कई बार किया खुलासा
अमर उजाला हस्तिनापुर में गंगा से कछुए पकड़कर उनकी तस्करी का खुलासा कर चुका है तो पक्षियों के शिकार का भी स्टिंग प्रकाशित कर चुका है। वन विभाग संसाधनों का अभाव बताकर चुप्पी साधता रहा है। यहां पर वन्य जीवों का शिकार भी धड़ल्ले से होता रहा है। पिछले दिनों कुछ शिकारियों ने एक पहाड़ा मारा और उसकी गर्दन काटकर मांस निकालते देखे गये। जिसका समाचार अमर उजाला ने प्रकाशित किया था। इसी तरह हस्तिनापुर के अकबरपुर में 15 दिन पूर्व नील गाय मारने को लेकर बखेड़ा खड़ा हुआ, लेकिन पुलिस ने जहां सेटिंग कर ली तो वन विभाग पूरे मामले पर चुप्पी साध गया।
इनका होता है शिकार
हस्तिनापुर वन क्षेत्र में पहाड़ा, खरखोग, नील गाय, विदेशी पक्षियों के साथ तीतर बटेर आदि और जलीय जीवों में मछली और कछुए आदि का शिकार और पकड़कर उनकी तस्करी भी होती है।
विज्ञापन


एक दशक से नहीं पकड़े गये शिकारी
हस्तिनापुर वन क्षेत्र में आये दिन शिकारी घूमते नजर आते हैं। यह शिकारी अधिकांश स्थानीय होते हैं। लेकिन पिछले एक दशक में वन विभाग या पुलिस ने एक भी शिकारी पकड़ा हो, इसका रिकार्ड नहीं है। 

एयरगन और खटका करते हैं प्रयोग
शिकारी यहां जानवरों के शिकार को खटका लगाकर शिकार करते हैं। जिसमें जानवर का पैर गर्दन आदि फँस जाती है। यह शिकार का सबसे सुरक्षित तरीका है। जिसमें बगैर आवाज के शिकार कब्जे में आ जाता है। जबकि पक्षियों का शिकार एयर गन या गुलेल से किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें