रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर। महाभारत काल की ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर में सरकार विकास कार्यों पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। वहीं इसकी विद्युत व्यवस्था आज भी 65 वर्ष पुरानी तकनीक फेड्रिक पोल पर अटकी हुई है। शहर में लगे जर्जर फेड्रिक पोल न केवल स्थानीय निवासियों के लिए बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक बड़ा खतरा बने हुए हैं। शिकायतों के बावजूद विद्युत विभाग इन खंभों को बदलने में सुस्ती दिखा रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
फेड्रिक पोल पूरी तरह लोहे के बने होते हैं और उन पर बिजली की लाइनें आज भी दौड़ रही हैं। इस पुरानी पद्धति के कारण बारिश के मौसम में इन फेड्रिक पोल में करंट आने की घटनाएं आम हैं। इसके चलते कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और कई झुलस चुके हैं। विद्युत विभाग के अधिकारियों को इस गंभीर समस्या की जानकारी होने के बावजूद वे केवल एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजने की बात कहते आ रहे हैं लेकिन खंभों को बदलने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। विद्युत विभाग की यह लापरवाही ऐतिहासिक नगरी के लोगों पर भारी पड़ रही है। इन फेड्रिक पोल की ऊंचाई भी काफी कम है। इसके कारण वे इमारतों और पेड़ों से छू रहे हैं। इससे करंट उतरने का खतरा और बढ़ जाता है।
पर्यटकों पर भी पड़ रहा बुरा असर
प्राचीन नगरी में आने वाले पर्यटक, सैलानी और श्रद्धालु भी जब 65 साल पुरानी विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को देखते हैं तो दंग रह जाते हैं। लोगों का कहना है कि देश में शायद ही कोई ऐसी जगह बची होगी जहां पर इतने पुराने फेड्रिक पोल लगे हों। यह स्थिति शहर की छवि को भी धूमिल कर रही है। नगर पंचायत क्षेत्र में मुख्य मार्ग पर लगे इन फेड्रिक पॉल और विद्युत लाइनों की कम ऊंचाई के कारण हर समय हादसे का अंदेशा बना रहता है।
चेयरपर्सन ने की फेड्रिक पोल बदलने की मांग
नगर पंचायत की चेयरपर्सन सुधा खटीक ने विद्युत विभाग के अधिकारियों को लिखित में देकर इन्हें बदलवाने की मांग की है। वहीं, जेई विद्युत उपखंड केंद्र हस्तिनापुर सतीश कुमार ने भी स्वीकार किया है कि नगर में पुराने फेड्रिक पोल हैं। इन्हें बदलवाने के लिए एस्टीमेट बनाकर विभाग के अधिकारियों को भेजा है।