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पुलिस ने नष्ट कर दिए हाशिमपुरा कांड के अभिलेख

Sat, 20 Feb 2016 01:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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हाशिमपुरा कांड में आए फैसले पर हाईकोर्ट दिल्ली में दायर अपील पर सुनवाई चल रही है। इस मामले में अधिवक्ता द्वारा हाशिमपुरा कांड से संबंधित अभिलेख एसएसपी से मांगे गए। जिस पर एसएसपी ने जवाब दिया है कि संबंधित रिकॉर्ड टाइम बार होने के कारण नष्ट किए जा चुके हैं। हाशिमपुरा जैसे अहम मामले के अभिलेखों का नष्ट होना जहां सवाल खड़े कर रहा है। वहीं पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने के लिए दायर अपील में भी कहीं न कहीं बाधा आ सकती है।
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मेरठ में वर्ष 1987 को हुआ हाशिमपुरा कांड देश के बड़े दंगों में शुमार है। इस मामले में लगातार लंबी सुनवाई के बाद पिछले साल सीबीआई कोर्ट से फैसला आया था। जिसमें सभी आरोपी पीएसी और पुलिसकर्मियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था। इस मामले को लेकर मुस्लिम समाज के लोगों ने जमकर विरोध दर्ज कराया तो प्रदेश सरकार ने अपनी तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की। जिस पर सुनवाई चल रही है।

पांच साल है अवधि
इसी मामले में 12 फरवरी को अधिवक्ता रामकिशोर यादव ने एसएसपी को पत्र लिखकर दंगे के दौरान नियुक्त पुलिस अधिकारी, कर्मचारी की ड्यूटी की तैनाती एवं बीड आउट के संबंध में स्थिति और नियम उपलब्ध कराने की मांग की थी। इस पत्र के जवाब में 15 फरवरी को एसएसपी ने जो जवाब भेजा, वह चौंकाने वाला है। एसएसपी ने पत्र में कहा है कि उक्त प्रकरण से संबंधित अभिलेख और रोजनामचा आम समय अवधि पूर्ण होने के बाद नष्ट कर दिया गया था। एसएसपी ने यह भी बताया कि अभिलेख नष्ट करने की अवधि पांच वर्ष है।
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नष्ट करने पर उठे सवाल
हाशिमपुरा प्रकरण उस समय देशभर में गूंजा था। इसमें दूसरे वर्ग के नहीं बल्कि पीएसी और पुलिस के अधिकारी व जवान नामजद हुए थे। जिनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद सीबीआई जांच हुई थी। लगातार इस मामले पर कोर्ट केस भी चला। अब सवाल यह उठता है कि केस के दौरान तमाम अभिलेख न्यायालय की संपत्ति हो गए थे, तो फिर कैसे उन्हें नष्ट कर दिया गया।

कहीं बचाने की नियत तो नहीं
हाशिमपुरा कांड के अभिलेख नष्ट होने के पीछे तत्कालीन अधिकारियों को बचाने की मंशा हो सकती है। यदि अब इस केस पर अपील चल रही है तो उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तो दूर, जब यही पता नहीं कि कौन कब तैनात था तो बयान तक कराना असंभव होगा।
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