क्या कहते हैं यहां के किसान
किसान हरेंद्र निवासी गांव पिंडौरा, ओमपाल, बिटटू नौनांगली के अलावा सुशील निवासी गांव केरटू ने बताया की हरियाणा के आढ़तियों से फसल बोने के लिए पेशगी ली हुई है। उसके बदले अब गेहूं वहां बेचना है, लेकिन उनका गेहूं रोक दिया गया है। समस्या का समाधान नहीं होगा वे लोग यहां से नहीं जाएंगे।
उधर, डीएम अखिलेश सिंह ने किसानों से अपील की है वे जनपद के सरकारी गेहूं खरीद केंद्र पर अपना गेहूं बेचें। वे एक दो दिन में ही भुगतान के प्रयास करेंगे। इसका भुगतान लेने के बाद वे हरियाणा के आढ़तियों से ली गई अपनी पेशगी दे सकते हैं।
छह खरीद केंद्रों पर गेहूं खरीद शुरू
पिछले दो दिनों में जिले के छह खरीद केंद्रों में गेहूं की खरीद शुरू हो गई है। अभी तक 1037 क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई है, जिनमें खाद्य विभाग का 520.50 क्विंटल, पीसीएफ द्वारा 517 क्विंटल गेहूं शामिल है। गेहूं की आवक नहीं आने से जिले के 21 खरीद केंद्र सूने पड़े हुए हैं।
जिले में एक अप्रैल से गेहूं खरीद के लिए जिला प्रशासन ने 27 खरीद केंद्र खोलकर गेहूं खरीद की व्यवस्था की थी। इस बार मौसम खराब होने के कारण देरी से गेहूं खरीद कार्य शुरू हो पाया है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी निहारिका ने बताया कि पिछले दो दिनों में जिले के थानाभवन मंडी, झिंझाना, बल्ला माजरा समेत छह खरीद केंद्रों पर 1037 क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई है। खाद्य विभाग का 520.50 क्विंटल, पीसीएफ द्वारा 517 क्विंटल गेहूं शामिल है।
उन्होंने बताया कि इस बार जिले में खरीद एजेंसियों का एक लाख 45 हजार क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 15 अप्रैल तक मात्र चार क्विंटल गेहूं हो पाई थी। इस बार पिछले दो दिनो में खाद्य विभाग व पीसीएफ के मात्र छह खरीद केंद्रों पर 1840 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई है। जिले में अभी तक 110 किसानों का पंजीकरण हो पाया है। किसानों का पंजीकरण कम होने से वेबसाइट में तकनीकी समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में यूपी किसानों पर रोक लगा दी है। वह जिले के खरीद केंद्रों पर किसानो को मूलभूत सुविधाएं देकर 48 घंटे से लेकर 72 घंटे में गेहूं के मूल्य की व्यवस्था कराएंगे।
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