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रेड लाइट एरिया में होगी बड़ी कार्रवाई, हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश करेंगे डीएम-एसएसपी और सीएमओ

Sun, 21 Apr 2019 11:47 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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कबाड़ी बाजार मेरठ - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ में रेड लाइट एरिया में सेक्स वर्करों और कोठों की स्थिति जानने के लिए शनिवार को पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने सर्वे किया। जहां पर सेक्स वर्कर गायब मिलीं और कोठों पर ताले जड़े मिले। 23 अप्रैल को हाईकोर्ट में जवाब देने से पूर्व ही पुलिस-प्रशासन ने रेड लाइट एरिया का रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मेरठ में गलत तरीके से चल रहे कोठों पर बड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

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रेड लाइट एरिया में कोठों को बंद कराने की पुलिस-प्रशासन ने शुरुआत कर दी है। 23 अप्रैल को डीएम अनिल ढींगरा, एसएसपी नितिन तिवारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकुमार को हाईकोर्ट में तलब किया गया है, जिसकी रिपोर्ट तैयार करने के लिए पुलिस-प्रशासन के पास सिर्फ दो दिन बचे हैं। कोठे बंद कराने के संबंध में याचिका दायर करने वाले हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की रिपोर्ट का हवाला देकर रिट दायर की है। 

इसको देखते शनिवार को एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी, उद्यान अधिकारी, एसीएम, सीओ ब्रह्मपुरी समेत पुलिस प्रशासन की टीम कबाड़ी बाजार में पहुंची। जहां पर रेड लाइट एरिया पर सेक्स वर्करों को तलाशा गया। पुलिस ने दावा किया कि सभी कोठों पर ताले लगे मिले और सेक्स वर्कर वहां पर नहीं मिलीं। आसपास के लोगों से पूछताछ की गई, जिन्होंने बताया कि कई दिनों से कोठों पर ताले लगे हुए हैं। सीओ ब्रह्मपुरी चक्रपाणि त्रिपाठी का कहना है कि गलत ढंग से चल रहे कोठे नहीं चलेंगे।

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क्या सूचना लीक हो गई 
लोगों का कहना है कि पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों द्वारा सर्वे करने की जानकारी रेड लाइट एरिया में कोठा संचालकों और सेक्स वर्करों को पहले से हो गई थी। सूचना लीक होने के चलते सभी सेक्स वर्कर वहां से दूसरी जगहों पर शिफ्ट कर कोठों पर ताला लगा दिया गया। कोठों के आसपास कुछ दलालों को लगाया गया, जिन्होंने पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को बताया कि ये कोठे तो कई दिनों से बंद हैं। 

कोर्ट के फैसले के बाद होगी अगली कार्रवाई 
एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह का कहना है कि 23 अप्रैल को हाईकोर्ट में पुलिस प्रशासन व नगर निगम के अधिकारियों को जाना है। हाईकोर्ट जो फैसला सुनाएगी, वह मान्य होगा। उसके बाद पुलिस प्रशासन कोठे के मामले में कार्रवाई करेगा। शनिवार को सिर्फ रेड लाइट एरिया का सर्वे किया गया है। स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम की रिपोर्ट का हवाला देकर वाद दायर किया गया। हालांकि अभी हाईकोर्ट ने अधिकारियों से इस संबंध में कोई जवाब नहीं मांगा। 

तीन बड़े कारण, दे सकते हैं छुटकारा  
पुलिस ने बताया तीन बड़े कारणों से मेरठ में रेड लाइट एरिया का दाग मिटाया जा सकता हैं। हाईकोर्ट अधिवक्ता सुनील चौधरी ने नगर निगम की रिपोर्ट में रेड लाइट एरिया में तीन सरकारी स्कूलों का होना बताया। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में सात सेक्स वर्करों को एचआईवी पॉजीटिव और छह सेक्स वर्करों की मौत होना बड़ा कारण हो सकता है। वहीं, तीसरा कारण मेरठ एंटी ह्यमून ट्रैफिकिंग यूनिट की छापामारी में नाबालिग लड़कियों को रेस्क्यू कराने की रिपोर्ट का हवाला दिया गया। जिसमें कई नाबालिग लड़कियों को कोठों से बंधन मुक्त कराया गया।
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पलायन कर चुके कई परिवार 
कबाड़ी बाजार व्यापारिक एरिया है। यहां मिश्रित आबादी है। शपथ पत्र में साल 2009 से मेरठ में रेड लाइट एरिया चलाना बताया गया है। तब से यहां से कई संभ्रात परिवार पलायन करके जा चुके हैं। यहां पर लोगों को इसका दंश झेलना पड़ता है। कई व्यापारियों के कारोबार पर भी फर्क पड़ा है। 

कोठे खाली कराने पर है स्टे
सेक्स वर्करों की तरफ से मई 2018 में एक रिट दायर की गई थी। जिसमें उन्होंने कोठे खाली कराने पर आपत्ति जताते हुए पुनर्वास की मांग की थी। इस रिट पर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सुनवाई करते हुए 22 मई 2018 को आदेश जारी करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता से उनके आवास, कमरे आदि खाली नहीं करा सकते हैं। हालांकि इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि रिट कोठों को खाली कराने के लिए नहीं बल्कि यहां पर होने वाले देह व्यापार को बंद कराने के लिए दायर की गई है। जिस पर पुलिस-प्रशासन को रोक लगानी होगी।

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