दोबारा से होगी जांच
मानसी आनंद के शिकायती पत्र पर मुकदमे की दोबारा से जांच होगी। विवेचना हापुड़ के एसपी को सौंप दी गई। निष्पक्ष जांच होगी, जो भी आरोपी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। - राजीव सभरवाल, एडीजी मेरठ जोन
एसपी सिटी की जांच में थे आरोपी, कैसे मिली क्लीन चिट
एसपी सिटी की जांच में नामजद आरोपी सिद्ध हो गए थे, लेकिन दरोगा की जांच में उनको क्लीन चिट दे दी गई। इसको लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। दरोगा की विवेचना ने एसपी सिटी की जांच पर सवाल उठा दिए हैं।
हरिओम आनंद की बेटी मानसी ने 3 पेज की तहरीर एसएसपी को दी थी। पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी और एसपी सिटी से पूरे मामले की जांच कराई। 20 दिन तक एसपी सिटी ने जांच की व मुकदमा दर्ज करने की बात कह दी। जांच रिपोर्ट के आधार पर मानसी की पहली तहरीर पर ही नामचीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।
एफआर कोर्ट में जमा
मेरठ पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लाजमी हैं। एडीजी-आईजी के निर्देश पर मामले की जांच हापुड़ ट्रांसफर हुई। इसके बावजूद बुधवार को एफआर कोर्ट में जमा की गई। इस मामले में पीड़ित परिवार के वकील रामकुमार शर्मा ने पुलिस के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग की है। वहीं सीनियर अधिवक्ता अमित दीक्षित का कहना है कि जिस मुकदमे में एफआर लग गई हो, उसकी जांच नहीं होती। दोबारा से विवेचना होती या फिर अग्रिम विवेचना (कुछ खास बिंदु पर जांच) होगी।