देश में ही नहीं विदेशियों को भी बासमती का स्वाद अच्छा लग रहा है। लगातार बढ़ रही विदेश में बासमती की मांग के बीच इस बार किसानों और एक्सपोर्टर के लिए भी अच्छी खबर है। पिछले तीन साल में सबसे अधिक विदेशी मुद्रा मिली है, जिसका लाभ सबसे अधिक किसानों को मिलेगा।
देश का एक मात्र सेंटर बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान मोदीपुरम के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन साल में बासमती ने विदेशी मुद्रा प्राप्त करने में अपना रिकॉर्ड तोड़ते हुए नया रिकॉर्ड बना दिया है। देश में ही नहीं विदेश में भी लोग बासमती को पसंद कर रहे हैं और लगातार बासमती का निर्यात बढ़ रहा है। बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान (बीईडीएफ) मोदीपुरम के वैज्ञानिक बासमती को लेकर एक्सपोर्टर और किसानों को जागरूक कर रहे हैं। इस बार खास बात यह है कि तीन साल पहले जितने बासमती का निर्यात हुआ था, उतना ही बासमती इस साल गया था। लेकिन विदेशी मुद्रा करीब चार हजार करोड़ रुपये अधिक रही है।
ये है तीन साल का निर्यात और मुद्रा
वर्ष निर्यात मुद्रा
2015-16 40.5 22718
2016-17 39.9 21665
2017-18 40.6 26777
नोट: बासमती निर्यात मीट्रिक टन में है और मुद्रा करोड़ में है। आंकडे़ 31 मार्च 2017 से 31 मार्च 2018 तक के है।
इन प्रमुख देशों में जाता है बासमती
बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ रितेश शर्मा ने बताया कि बासमती सऊदी अरब, ईराक, ईरान, कुवैत, ओमान, तुर्की, कनाडा, बेल्जियम, इटली, फ्रांस, मलेशिया, सीरिया, साउथ अफ्रीका, अलजीरिया, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल, स्वीडन, जर्मनी, इजराइल, बहरीन, आस्ट्रेलिया, जोरडन, नीदरलैंड, लेबनान, सिंगापुर, जापान समेत करीब 165 देशों में अपने देश की बासमती का डंका बज रहा है।