इसी तरह मोहम्मद इकबाल के बेटे वाजिद के खिलाफ चल रहे वाद में भी अपर जिला मजिस्ट्रेट ने निर्णय सुनाया है कि 9.21 हेक्टेयर भूमि में से 5.0586 हेक्टेयर भूमि को छोड़ते हुए अवशेष भूमि 4.1514 हेक्टेयर समस्त प्रकार के भार से मुक्त घोषित कर राज्य सरकार में निहित की जाती है और उपजिलाधिकारी बेहट को उक्त भूमि का अंकन राजस्व अभिलेखों में कराकर उस पर कब्जा प्राप्त करने का निर्देश दिया गया है। निर्णय में यह भी उल्लेख है कि यह राजस्व संहिता की धारा 89(2) का उल्लंघन माना गया, जिसमें किसी व्यक्ति द्वारा साढ़े 12 हेक्टेयर से अधिक भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का प्रावधान है।
अपर जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) विनोद कुमार का कहना है कि मोहम्मद इकबाल और उनके बेटे वाजिद के खिलाफ चल रहे वाद में निर्णय सुना दिया गया है। निर्णय का पालन करने के संबंध में उपजिलाधिकारी बेहट को पत्र भेज दिया है।
उधर, इस बारे में हाजी मोहम्मद इकबाल के भाई बसपा एमएलसी हाजी महमूद अली का कहना है कि एक साल पूर्व अपर जिला मजिस्ट्रेट के यहां से नोटिस आए थे। उसके बाद हाईकोर्ट और राजस्व परिषद से उनके पक्ष में आदेश हुआ, जिसकी कॉपी छह महीने पहले ही अपर जिला मजिस्ट्रेट के यहां जमा करा दी गई। यदि इसके बाद भी अपर जिला मजिस्ट्रेट ने हमारे खिलाफ कोई निर्णय किया है, तो यह हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना है। वह इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
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