बागपत के लिए भी...
संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने कर दिया था बरी
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। बागपत में हिस्ट्रीशीटर प्रवीण उर्फ बब्बू की हत्या के आरोपी ज्ञानेंद्र ढाका का नाम वर्ष 2007 में मेरठ जेल के डिप्टी जेलर नरेंद्र द्विवेदी की हत्या में भी सामने आया था। जेल चुंगी के पास उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अजय जड़ेजा का नाम भी जुड़ा था। संदेह के आधार पर अदालत ने ज्ञानेंद्र ढाका को बरी कर दिया था।
मेरठ जिला कारागार मेरठ के डिप्टी जेलर नरेंद्र द्विवेदी की 7 अगस्त 2007 को सरेशाम जेल चुंगी बाजार में दो बाइक सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। डिप्टी जेलर उस समय अपनी सेंट्रो कार में बैठे थे, जबकि उनकी पत्नी व बच्चे रिटेल स्टोर स्पेंसर्स में खरीदारी कर रहे थे। अगले दिन नरेंद्र के पिता दयाराम द्विवेदी ने पूर्व वरिष्ठ अधीक्षक यादवेंद्र शुक्ला व दो डिप्टी जेलरों राजीव कुमार सिंह व अविनाश चौहान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने डिप्टी जेलर राजीव व अविनाश को गिरफ्तार किया था। बाद में पुलिस ने आठ शूटरों के खिलाफ चार्जशीट अदालत में पेश की। हालांकि बाद में यह केस दो बार और खोला गया, जिसमें शार्प शूटरों के नाम बदलते गए। कोर्ट ने वर्ष 2012 में हत्याकांड में आरोपी बनाए गए विनोद गुर्जर, ज्ञानेंद्र ढाका, अजय जडेजा, नीरज भाटी, रॉबिन उर्फ नरेंद्र शाक्य व पिंटू आदि छह शूटरों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।
जबकि दोनों डिप्टी जेलरों राजीव कुमार सिंह व अविनाश चौहान को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। खास बात यह थी कि दोनों को षड्यंत्र के आरोप में बरी करते हुए सीधे-सीधे 302 का मुल्जिम मानते हुए सजा सुनाई थी। इस मामले में वरिष्ठ जेल अधीक्षक यादवेंद्र शुक्ला व अन्य शूटरों के खिलाफ भी कोर्ट में मुकदमा चला था।