कूड़ा निस्तारण प्लांट को लेकर दो साल से चल रही मशक्कत अब अंतिम चरण में है। कूड़े से बिजली बनना तो संभव नहीं दिख रहा है। लेकिन बायो कंपोस्ट खाद जरूर बनेगी। इसके लिए नगर निगम ने गुजरात मॉडल अपनाने का निर्णय लिया है। इससे जहां कंपोस्ट खाद बनेगी वहीं प्लास्टिक, लोहा आदि अंशों को अलग करके बाजार में बेचा जा सकेगा। नगर निगम प्रथम चरण में 200 मीट्रिक टन कूड़े के निस्तारण का प्लांट लगाने की तैयारी में है। ताकि कूड़े के निस्तारण सुचारु रूप से हो सके।
रोजाना 800 मीट्रिक टन कूड़ा
महानगर से प्रतिदिन करीब 800 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। फिलहाल इस कूड़े का निस्तारण नहीं हो रहा है। सड़कों के किनारे और खाली प्लाटों में कूड़ा डाला जा रहा है। कूड़े की जगह-जगह पहाड़ियों को लेकर नगर निगम ही नहीं बल्कि जिला प्रशासन को भी एनजीटी में फटकार झेलनी पड़ रही है। लेकिन कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
गांवड़ी में है प्रस्तावित
किला रोड स्थित गांवड़ी में नगर निगम की भूमि पर कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाया जाना प्रस्तावित है। एक साल पहले नगर निगम और जिला प्रशासन ने इस प्लांट के लिए भूमि पूजन भी किया था। यह बात अलग है कि अभी तक प्लांट लग नहीं पाया है।
महाराष्ट्र की कंपनी से अनुबंध
गांवड़ी में कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने के लिए महाराष्ट्र की कंपनी आगे आयी थी। कंपनी और नगर निगम प्रशासन के बीच अनुबंध भी हुआ था। जिसमें कंपनी ने कूड़े से बिजली बनाने की बात कही थी। हालांकि बाद में कंपनी ने इससे हाथ खींचकर कंपोस्ट खाद का नया प्रस्ताव रख दिया। अब उसी प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाना है।
गुजरात मॉडल में भी बन रहा कंपोस्ट
गुजरात के सूरत शहर में संचालित कूड़ा निस्तारण प्लांट का नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान, चीफ इंजीनियर कुलभूषण वार्ष्णेय, एफसी संतोष शर्मा, लेखाधिकारी मनोज त्रिपाठी आदि अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने जायजा लिया है। अधिकारियों ने अपने सामने प्लांट को चलते देखा है। जिससे अब विश्वास होने लगा है कि मेरठ में कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाया जाएगा।
प्लांट हमारी प्राथमिकता
गुजरात के कूड़ा निस्तारण प्लांट में कंपोस्ट खाद बनायी जा रही है। प्लास्टिक, लोहा, लकड़ी आदि सामान को कूड़े के ढेर से निकालकर बाजार में बेचा जा सकता है। मेरठ में काम करने को तैयार कंपनी से बात की जाएगी। कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाना हमारी प्राथमिकता में है। -मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त