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यूपी: एफसीआई परीक्षा में नकली परीक्षार्थी बनकर पेपर दिलाने वाले गैंग का भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार

Sun, 30 Sep 2018 06:40 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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सहारनपुर न्यूज - फोटो : अमर उजाला
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उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में  जीआरपी ने एफसीआई (वॉचमैन) की परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी बनकर परीक्षा देने वाले गैंग का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जिनके पास से कई मोबाइल व फर्जी आईडी व प्रवेश पत्र भी बरामद हुए हैं। जानें कैसे फर्जीवा़ड़ा करता था यह गैंग:- 
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पुलिस उपाधीक्षक रेलवे सहारनपुर, अशोक कुमार दीक्षित के निर्देशन में आज जीआरपी थाना सहारनपुर ने मुखबिर की सूचना पर एफसीआई (वॉचमैन) की परीक्षा में नकली परीक्षार्थी बनकर पेपर दिलाने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गैंग के लीडर सहित पांच सदस्यों को रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया है। इनके पास से नकली आधार कार्ड, नकली प्रवेश पत्र व मोबाइल बरामद किए गए हैं। 

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में नीरज पुत्र मांगेराम निवासी पुसार थाना दो घट बागपत का रहने वाला है। तरुण दहिया पुत्र प्रदीप आबूपुर जिला गाजियाबाद, सुमित पुत्र भूरे सिंह निवासी मेरठ, रोहित पुत्र लीलू निवासी बागपत तथा महेंद्र पुत्र वीरेंद्र निवासी बागपत और मनीष पुत्र भोपाल निवासी बागपत शामिल हैं।

ये सामान हुआ बरामद
गैंग के पास से आठ मोबाइल फोन,16000 रुपये नगद, 11 नकली आईकार्ड, 11 नकली एडमिट कार्ड, 11 फोटो व एक ईको मारुति कार बरामद की गई है, जिसे पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस के मुताबिक इनमें बागपत का रहने वाला मनीष कार का ड्राइवर है।
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गैंगलीडर नीरज से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि आज एफसीआई की परीक्षा होनी थी। जिसके लिए डेढ़-डेढ लाख रुपये में परीक्षा देने वाले असली प्रतियोगी की जगह नकली परीक्षार्थी को बैठाने की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए सॉल्वर को बुलवाया गया था जो कैंडीडेट की जगह पर परीक्षा देते हैं। इसके लिए पहले से ही फर्जी आई कार्ड, एडमिट कार्ड तैयार कर लिए गए थे। आरोपी तरुण दहिया खुद प्रतियोगी है लेकिन उसकी जगह सॉल्वर को बैठाने की व्यवस्था थी।
 
आरोपी नीरज के मोबाइल में एेसे मैसेज मिले हैं जिनमें उसने फर्जी भर्ती कराने की बात की है। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह साल 2016 में हुई ग्रुप डी की परीक्षा में भी फर्जीवाड़ा कर चुका है और भर्ती कराने की कोशिश की थी, लेकिन लड़के भर्ती नहीं हो पाए।
 
पुलिस के मुताबिक आरोपी पर इस भर्ती का कुल 32 लाख कर्ज है। इसलिए वह एफसीआई परीक्षा में फिर से भर्ती करा रहा था। यह परीक्षा बायोमैट्रिक नहीं है इसलिए इसमें दूसरे प्रतियोगी को आसानी से बैठाया जा सकता था और आसानी से फर्जीवाड़ा किया जा सकता था, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने इन्हें धर दबोचा। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

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