ग्रे लेग गूज की चहचहाहट से गूंज रही सेंक्चुरी हस्तिनापुर सेंक्चुरी में प्रवासी पक्षियों में इस बार ग्रे लेग गूज काफी संख्या में आई हैं। यह चिड़िया हिमालय रीजन, चीन और तिब्बत में पाई जाती हैं। ठंड बढ़ने पर यह माइग्रेट करती हैं। फरवरी में प्रवासी पक्षी वापस लौटने लगते हैं। जानकारों का कहना है इस बार प्रवासी पक्षी अधिक आए हैं।
बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस) के पूर्व निदेशक डॉ. अरशद रहमानी ने हस्तिनापुर सेंक्चुरी का दौरा कर वन विभाग को यह जानकारी दी। बता दें कि बीएनएचएस चिड़ियों के संरक्षण में काम करने वाली भारत की सबसे पुरानी सोसायटी में से एक है। डॉ. अरशद ने मुजफ्फरनगर जिले में हैदरपुर झील का भ्रमण किया। वहां पर ग्रे लेग गूज काफी संख्या में दिखीं। आंकड़ा एक हजार से अधिक का है। उन्होंने मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश को बताया कि इतनी संख्या में यह चिड़िया उन्होंने एकसाथ नहीं देखी। यह सेंक्चुरी के लिए अच्छी बात है। विभाग इस पर काम करे। वन विभाग ने सेंक्चुरी में वैट लैंड चिह्नित किए हैं। हैदरपुर उनमें से एक है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वाइल्ड लाइफ साइंस विभाग में प्रोफेसर डॉ. हफीलउल्ला खान का कहना है ग्रे लेग गूज भरतपुर और अलीगढ़ में भी माइग्रेट करके आती हैं। उनके विभाग ने ग्रे लेग गूज पर रिसर्च की थी। सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाकर पता किया था। ग्रे लेग गूज 24 घंटे में बिना रुके साउथ चाइना सी पहुंच गई थीं। मौसम और परिस्थितियों के हिसाब से इस बार प्रवासी पक्षी अधिक आने का अनुमान था। ऐसा हुआ भी है। फरवरी में प्रवासी पक्षी लौटना शुरू कर देते हैं। एक सप्ताह बाद जैसे ही तापमान में कुछ उछाल आएगा, पक्षी वापस लौटने लगेंगे।