मृतक के पौते सार्थक यादव पुत्र स्वर्गीय सतपाल सिंह यादव ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस विवेचना में मृतक के पौते अक्षय यादव पुत्र मनोज यादव का नाम प्रकाश में आया। रविवार को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से पूछताछ के बाद एसपी ने बताया कि मृतक भंवर सिंह यादव के तीन बेटे महकार, सतपाल सिंह, व मनोज थे।
बड़े बेटे महकार की 25 साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। दूसरे बेटे सतपाल सिंह की पांच साल पहले प्रोपर्टी विवाद में हत्या कर दी गई थी। छोटा बेटा मनोज परिवार सहित अलग रहता था। मृतक अपने मंझले बेटे सतपाल के परिवार के साथ रहता था।
मृतक का छोटे बेटे मनोज से प्रोपर्टी व पेंशन के रूपये को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि मृतक उन्हें प्रोपर्टी में हिस्सा नहीं दे रहा था। उसके पिता पर लाखों रूपये कर्ज हो गया था। उसकी नौकरी भी नहीं लग पा रही थी।
आरोपी अक्षय अपने बाबा से कृषि भूमि पर ऋण निकालकर देने के लिए कह रहा था, लेकिन बाबा ने ऋण लेने से इंकार कर दिया था। इसी विवाद में उसने बाबा की निर्मम हत्या कर दी। घटना को अंजाम देने के बाद स्कूटी पर सवार होकर मेरठ अपने घर चला गया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त चाकू, फावड़ा, डंडा, नारियल, स्कूटी, मोबाइल, खून से सने कपड़े बरामद किए।
मेरठ में मुठभेड़ स्थल से मिला था चाकू
पुलिस ने बताया कि मेरठ के माधवपुर में मार्च माह में बदमाशों व पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई थी। जिसमें घटना स्थल पर बदमाशों का चाकू व पिस्टल नहीं मिला था। आरोपी अक्षय को मुठभेड़ स्थल पर बदमाशों का चाकू मिला था। इसी चाकू से अपने बाबा की हत्या कर दी।
दुकान पर सामान लेने आई युवती ने देखी थी घटना
अमीनगर सराय में दुकान पर जिस समय आरोपी अक्षय अपने बाबा भंवर सिंह की हत्या कर रहा था तो उसी समय एक युवती सामान लेने आई थी। उसे आरोपी को हत्या करते हुए देख लिया था। युवती वापस घर भाग गई थी। आरोपी को आसपास के दुकानदारों ने भी भागते हुए देखा था।
नौकरी के बहाने घर से निकल जाता था आरोपी
बागपत। पुलिस ने बताया कि आरोपी अक्षय पहले दिल्ली में नौकरी करता था। उसने नौकरी छोड़ दी थी। पिता मनोज उस पर नौकरी करने का दबाव बनाता था। कई दिन पहले उसने परिजनों को नौकरी लगने की झूठी जानकारी दी। वह सुबह घर से यह कहकर निकल जाता था कि वह नौकरी पर जा रहा है और शाम को इधर-उधर घूमकर वापस घर चला जाता था।