यह सीट महज एक चुनावी क्षेत्र नहीं, बल्कि मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर समेत नौ जिलों के शिक्षित मतदाताओं की नब्ज है। 2020 के चुनाव में भाजपा ने यहां रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया था। शिक्षक सीट पर श्रीचंद शर्मा ने आठ बार के एमएलसी ओमप्रकाश शर्मा को पटखनी दी, जबकि स्नातक सीट पर दिनेश गोयल ने चार बार के एमएलसी हेम सिंह पुंडीर को मात देकर सबको चौंका दिया था। भाजपा की यह जीत न सिर्फ राजनीतिक थी, बल्कि शिक्षक राजनीति के ढांचे को हिलाकर रख देने वाली थी।
आरएसएस और भाजपा खेमे में लामबंदीशिक्षक संगठनों की पकड़ ढीली पड़ते ही भीतर खलबली मच गई है। ठकुराई गुट के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. उमेश चंद्र त्यागी, जो चार बार चुनाव लड़ चुके हैं, इस बार मैदान से बाहर रहने की तैयारी में हैं। ऐसे में नए चेहरे आगे आ रहे हैं।
डीएन इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य और उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह भाजपा से टिकट लेने की कवायद में जुटे हैं। आरएसएस से लेकर भाजपा नेतृत्व तक, सबके दरवाजे खटखटा रहे हैं। उधर, जयकिसान इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य और परिषद के जिलाध्यक्ष इंद्रेश अधाना भी टिकट मांगने वालों की सूची में शामिल हो चुके हैं। दिलचस्प बात यह कि वे वरिष्ठ भाजपा नेता नरेश गुर्जर के भाई भी हैं, यानी राजनीतिक नेटवर्क मजबूत है और दावा दमदार भी।
शिक्षक राजनीति लेगी नए आयाम
एमएलसी का यह चुनाव सिर्फ सीट का नहीं, बल्कि शिक्षक राजनीति के पुनर्गठन का युद्धक्षेत्र बन चुका है। भाजपा के टिकट पर भारी भीड़, विपक्ष की सक्रियता और बदलते समीकरणों ने मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि शिक्षित मतदाता पर किसकी पकड़ मजबूत है और किसकी उम्मीदों को नया रास्ता मिलता है।
सपा-कांग्रेस ने तेज किया प्रचार, मैदान गर्म :
विपक्ष भी पीछे नहीं है। सपा ने गौतमबुद्धनगर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट प्रमेंद्र सिंह भाटी को उम्मीदवार बनाकर प्रचार तेज कर दिया है।
कांग्रेस ने विक्रांत त्यागी वशिष्ट को मैदान में उतारा है, जो वर्षों से इस चुनाव के लिए तैयारी करते रहे हैं। वहीं, शर्मा गुट से मेरठ जिलाध्यक्ष गजेंद्र वर्मा और पूर्व एमएलसी हेम सिंह पुंडीर के पुत्र सुशील पुंडीर भी अपनी ताल ठोक रहे हैं।
इंद्रेश अधाना का कहना है कि शिक्षा का भला शिक्षक ही कर सकता है। भाजपा को स्नातक सीट पर शिक्षक को ही मौका देना चाहिए।
सुशील कुमार सिंह कहते हैं कि मैं युवाओं व शिक्षकों की लड़ाई लगातार लड़ रहा हूं। अधिक से अधिक युवा मतदाता जोड़कर चुनाव की तैयारियों में जुटा हूं।