मेरठ में घर आवा अपणा गौं का वास्ता कुछ करा (अपने घर आओ और गांव के लिए कुछ करो) ये बात उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बालेराम ब्रजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित उत्तरांचल उत्थान परिषद् की 5वीं प्रवासी पंचायत में कही। रावत ने कहा कि हिमालय की बिखरती ग्राम व्यवस्था को संवारने में प्रवासी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
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रावत ने कहा कि उत्तराखंड में तमाम संसाधन होने के बावजूद वहां से हुआ बड़ी संख्या में लोगों का पलायन चिंता का विषय तो है, लेकिन समस्या नहीं है। लोग मुख्यत: तीन कारणों शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य की वजह से वहां से पलायन किए हैं। इसे रोकने के लिए उनकी सरकार ने पलायन आयोग का गठन किया है। आयोग न केवल पलायन रोकने का काम कर रहा है बल्कि पलायन करने वाले लोगों के लिए भी वापसी के अवसर तलाश कर रहा है। रावत ने कहा कि उत्तराखंड की 600 किलोमीटर सीमा अंतर्राष्ट्रीय है। इसकी जिम्मेदारी सेना पर नहीं छोड़ी जा सकती है। इसके लिए सीमावर्ती गांवों में लोगों का रहना भी बेहद जरूरी है। एक समय था जब शोधकर्ता उत्तराखंड को हिमाचल प्रदेश से ज्यादा अच्छा बताते थे, लेकिन आज हिमाचल प्रदेश को विकास के मामले में आगे बताते हैं। हिमाचल प्रदेश के विकास में बागवानी का बड़ा हाथ है। विकसित की गई सेब की नई प्रजाति से एक एकड़ में 5 टन सेब लिए जा रहे हैं।
80 फीसदी जमीन कर रही इंतजार
रावत ने उत्तराखंड के प्रवासियों को अपने राज्य और अपने गांव के लिए कुछ करने की अपील करते हुए कहा कि उत्तराखंड में केवल 20 फीसदी जमीन पर खेती हो रही है। 80 फीसदी जमीन उनके इंतजार में है। उनकी सरकार खेती और बागवानी के लिए एक से बढ़कर एक योजनाएं और सुविधाएं मुहैया करा रही है। प्रवासी आएं और अपने राज्य की खुशहाली को हिमाचल प्रदेश से आगे ले जाएं। उन्होंने नौजवानों को कहा कि आज सोशल मीडिया का युग है। वे अपने घर के सामने सेल्फी लें और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करें। रावत ने मारवाड़ियों से सीख लेने की बात कहते हुए कहा कि मारवाड़ी लोग चाहे कहीं पर भी रहे, लेकिन वे लोग शादी और बच्चे का मुंडन अपने गांव में आकर कराते हैं। रावत ने कहा कि सबसे ज्यादा पलायन पौढ़ी जनपद से हुआ है। उनकी सरकार ने 670 न्याय पंचायतों में रोजगार के साधन उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया है और उसका मुख्यालय पौढ़ी को ही चुना है। रावत ने प्रवासियों से किसी भी समस्या और शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1905 पर कॉल करने और टीएस रावत बीजेपी अकाउंट पर सुझाव देने की अपील की।
प्रदेश की पर्यटन, महिला एवं बाल विकास मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि उत्तराखंड के लोग ईमानदार और बहादुर है। इनमें देशभक्ति कूट-कूटकर भरी है। उत्तराखंड ने ही प्रदेश को पहला सीएम दिया था और सेना में भी इनकी संख्या करीब 25 फीसदी है। कहा कि उत्तराखंड के लोग खुशनसीब है कि उन्होंने देवभूमि में जन्म लिया। सभी तीर्थ यहां पर हैं, हम धार्मिक ही नहीं बल्कि राष्ट्रभक्त भी हैं। प्रवासी कितनी भी तरक्की कर लें, लेकिन उनकी पहचान अपनी जड़ों से ही होती है। उन्होंने महिलाओं से आह्वान करते हुए कहा कि उत्तराखंड और महाराष्ट्र की महिलाएं हमेशा आगे रही हैं। प्रवासियों की घर वापसी में महिलाओं का ही सबसे बड़ा हाथ रहेगा। इस मौके पर सांसद राजेंद्र अग्रवाल, विधायक सोमेंद्र तोमर, डॉ. सरोजिनी अग्रवाल, दयानंद चंदौला, एसएस नेगी शामिल रहे। प्रवासी पंचायत के केंद्रीय अध्यक्ष प्रेम बुडाकोटी, संयोजक रमेश सेमवाल, डॉ. नवदीप जोशी, वीरेंद्र सेमवाल, महावीर सिंह गुंसाई, बीर सिंह रावत आदि ने कार्यक्रम को संबोधित किया। संचालन रामप्रकाश पैन्यूली ने किया।
सराहनीय कार्य करने वालों को सम्मानित किया
सेवा संस्थाओं के माध्यम से सराहनीय कार्य कर रहे लोगों को सीएम त्रिवेंद्र रावत ने सम्मानित किया। इसमें बच्ची राम ढौंढियाल, बचन सिंह रावत, सुधीर सुंद्रियाल, गौरव लटवाल, खुशहाल सिंह, धीरेंद्र भट्ट, शंकर सिंह नेगी, राजेंद्र सिंह बिष्ट, शिव ढौंढियाल, विष्णु प्रसाद सेमवाल आदि शामिल रहे।
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