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सरकारी तंत्र ही बना उद्योगों के विकास में बाधा

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मेरठ। जिले में उद्योगों के विकास में केवल जमीन की कमी ही नहीं बल्कि सरकारी तंत्र और नियम भी बाधा बन चुके हैं। यूपीएसआईडीसी और जिला उद्योग विभाग उद्योगों को विकास के लिए जमीन उपलब्ध कराने में फेल है। उद्यमी पिछले चार, पांच सालों से जमीन की मांग कर रहे हैं। वहीं जिन उद्यमियों ने निजी जमीन खरीदकर वहां उद्योग विकसित करने का कदम उठाया है वहां सरकारी नियम विकास में आड़े आ रहे हैं। विभागों की लेटलतीफी के चलते औद्योगिक विकास ठप हो चुका है। पिछले कुछ समय में जिला उद्योग बंधु की बैठक में उद्यमी लगातार ये शिकायतें ला रहे हैं, मगर उनका हल नहीं हो रहा है।
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हाल में ही दिसंबर में हुई जिला उद्योग बंधु की बैठक में भी चार प्रमुख मामले जमीनों से जुड़े थे। जिसमें एमडीए ने मानचित्र पास नहीं किया तो कहीं जमीन के प्रयोग में परिवर्तन नहीं हो रहा है।
केस 01: पंजाब इंजीनियर्स के मलकीत सिंह ने बताया कि बागपत रोड पांचली के पास आउटर रिंग रोड को छूते हुए एग्रीकल्चर उत्पादन के लिए 17 हजार गज जमीन खरीदी है, लेकिन एमडीए नक्शा पास नहीं कर रहा। नवंबर से ही मामला लंबित है।
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केस 02: अरिहंत इंडस्ट्रीज की जमीन को एमडीए ने वन विभाग की सीमा में बताकर जमीन के प्रयोग में परिवर्तन नहीं किया है। मामला मार्च 2019 से लंबित चल रहा है।
केस 03: मानसरोवर इंफ्राबिल्ड के निदेशक कमल ठाकुर ने पांचली खुर्द में जमीन जो राजस्व विभाग के पास नालों के रुप में अंकित है उसे श्रेणी परिवर्तन कर उद्योग के लिए देने की मांग की, लेकिन यह मामला भी हल नहीं हो रहा।
केस 04: हरियाणा में कास्टैक्स इंजीनियरिंग के संचालक सोमिल गुप्ता मेरठ में अपनी फैक्टरी शिफ्ट करना चाहते हैं, लेकिन एमडीएम से नक्शा स्वीकृत नहीं किया जा रहा, जिसके कारण मामले को उद्योग बंधु बैठक में रखा गया, वहां भी मामला लंबित है।
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