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अधिवक्ताओं में मायूसी: हाईकोर्ट बेंच की स्थापना संबंधी कार्यवाही का निर्णय सरकार ने 24 घंटे में पलटा

Fri, 26 Jan 2024 12:04 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

खंडपीठ की स्थापना संबंधी शासन के दो विरोधाभासी निर्णय से अधिवक्ताओं में मायूसी पसरी है। शासन ने उच्च न्यायालय के निबंधक को जारी कार्यवाही का पत्र 24 घंटे में निरस्त कर दिया।
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- फोटो : istock
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विस्तार
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पिछले 65 साल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना को लेकर शासकीय जद्दोजहद एक बार फिर फाइलों में उलझकर रह गई। इस बाबत उत्तर प्रदेश शासन ने दो विरोधाभासी निर्णय देकर असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। इससे आंदोलन की सफलता को भी बड़ा झटका लगता नजर आ रहा है।

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गौरतलब है कि 19 जनवरी को उप्र शासन के विशेष सचिव ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद के महानिबंधक को पउप्र में उच्च न्यायालय की खण्डपीठ की स्थापना के संबंध में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही का पत्र जारी किया था, लेकिन अगले 24 घंटे में विशेष सचिव ने अपने ही पत्र के क्रियान्वयन को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की जानकारी महानिबंधक दे दी।

इस निर्णय से बेंच की स्थापना के लिए आंदोलनरत अधिवक्ताओं के बीच मायूसी छा गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने राजनीतिक लाभ के लिए पउप्र की जनता के साथ अन्याय कर रही है।

उप्र शासन के विशेष सचिव बालकृष्ण एऩ रंजन ने 19 जनवरी को उच्च न्यायालय इलाहाबाद के महानिबंधक को शासकीय पत्र जारी कर उल्लिखित किया था कि पउप्र में उच्चन्यायालय के खण्डपीठ की स्थापना के संबंध में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाए। इस पत्र के जारी होने से शासकीय और सियासी गलियारे में मची हलचल कुछ घंटे बाद ही थम गई।

हुआ यूं कि 20 जनवरी यानी 24 घंटे के भीतर विशेष सचिव बालकृष्ण एऩ रंजन ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद के महानिबंधक को अपने पत्र के क्रियान्वयन को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की जानकारी संबंधी पत्र जारी कर दिया। इससे पउप्र में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना को लेकर चले आ रहे आंदोलन की सफलता को एक बाद फिर झटका लगा है।

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इनका कहना है 
यह कोई नई बात नहीं है। हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के मुद्दे पर सरकार का हमेशा से ही उपेक्षापूर्व रवैया रहा है। पश्चिमी उप्र की जनता को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। - रोहिताश्व अग्रवाल, सदस्य एवं पूर्व अध्यक्ष बार कौंसिल ऑफ उप्र।

सरकार अपने राजनीतिक लाभ के लिए पउप्र की जनता के साथ अन्याय कर रही है। पूरे देश में सर्वाधिक मुकदमे पउप्र के हैं, वहां की जनता को हाईकोर्ट बैंच तक मुहैया नही है, ये बेहद अफसोसजनक है। - कुंवरपाल शर्मा, चेयरमैन, पउप्र केन्द्रीय संघर्ष समिति।

सरकारों की नीतियों के चलते पउप्र की जनता को हमेशा मायूसी ही हाथ लगी है। यहां की जनता को न्याय लेने के लिए पीढ़िया गुजारनी पड़ रही हैं। जनता को शीघ्र सस्ता व सुलभ न्याय चाहिये। -विनोद चौधरी, संयोजक, पउप्र केन्द्रीय संघर्ष समिति।

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