पिछले सप्ताह निगम कार्यकारिणी सदस्य ललित नागदेव ने न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए महापौर और नगरायुक्त को पत्र लिखा था। महापौर सुनीता वर्मा ने भी नगरायुक्त अमितपाल शर्मा को पत्र लिखकर विधिक राय लेने के निर्देश दिए थे।
निगम प्रशासन ने तो अभी तक विधिक राय भी नहीं ली थी। नगर विकास के प्रमुख सचिव के पत्र के बाद स्पष्ट हो गया है कि मेरठ नगर निगम की पहली बोर्ड बैठक आठ जनवरी को हुई थी। इसी आधार पर नगर निगम बोर्ड का अस्तित्व अब आठ जनवरी तक रहेगा।
महापौर सुनीता वर्मा का कहना है कि शासन के निर्णय का स्वागत है। निगम के अधिकारियों ने बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने की आशा में शहर का विकास ही ठप कर दिया। नगरायुक्त को पत्र लिख दिया गया है वह विकास कार्य शुरू कराएं।