मेडिकल कॉलेज में बिना स्ट्रेचर परेशान होते मरीज
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मेरठ मेडिकल कॉलेज में जागृति विहार के रामपाल (70) को रक्त की जांच के लिए द्वितीय तल पर जाना था, लेकिन न लिफ्ट चल रही है और न ही स्ट्रेचर मिला। बीमार होने के बावजूद उन्हें सीढ़ियों के जरिये द्वितीय तल पर जाना पड़ा। यह परेशानी अकेले इन बुजुर्ग की नहीं है। यहां हर रोज सैकड़ों लोग इस परेशानी से दोचार होते हैं। दरअसल, सरकारी अस्पतालों में हालात यह हैं कि मरीजों को लिफ्ट और स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हो पा रहे हैं। पीएल शर्मा जिला अस्पताल हो या एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, दोनों जगह कमोबेश एक जैसे ही हालात हैं।
जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की लिफ्ट सालों से खराब पड़ी हैं। जिला अस्पताल में मरीज को भूतल से प्रथम तल या फिर द्वितीय और तृतीय तल पर ले जाना पड़े तो रैंप और सीढ़ियां ही सहारा हैं। मरीज को शिफ्ट करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। मेडिकल कॉलेज में स्ट्रेचर में ताले लगे रहते हैं। मरीज को अगर स्ट्रेचर चाहिए तो उसे पहले आधार कार्ड जमा करना पड़ता है, फिर उसे स्ट्रेचर मिलता है। ऐसे ही हालात जिला अस्पताल के भी हैं, यहां स्ट्रेचर में ताले तो लगे हुए नहीं हैं, लेकिन मरीजों को स्ट्रेचर के लिए भटकना पड़ता है। मरीजों को हाथों पर या फिर सहारे से ओपीडी तक या वार्ड तक ले जाना पड़ता है। स्ट्रेचर मिल भी जाए तो तीमारदारों को खुद स्ट्रेचर खींचकर ले जाना पड़ता है। वार्ड ब्वाय या स्टाफ उन्हें ले जाने की जहमत नहीं उठाते हैं।