मिलावटी तेल के मामले में शासन पैनी नजर बनाए हुए है। अधिकारियों में चर्चा है कि इस मामले की गोपनीय जांच भी शुरू हो चुकी है। जिसमें कार्रवाई के स्तर और गति को लेकर किसी पर भी गाज गिर सकती है, जिससे हड़कंप मचा हुआ है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस प्रकरण में बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
20 अगस्त को दो केमिकल फैक्टरियों ने पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर छापामारी कर मिलावटी तेल का भंडाफोड़ किया था। जिसमें पुलिस ने केमिकल फैक्टरी के मालिक और तेल कारोबारी समेत 11 लोग जेल भेजे थे। पुलिस ने फैक्टरियों के भूमिगत टैंकों में 2.20 लाख केमिकल/मिलावटी तेल होना बताया है।
हालांकि इन टैंकों को खोदाई नहीं हुई और मिलावटी डीजल और पेट्रोल के सैंपल जांच के लिए लखनऊ सीएफएसएल और दिल्ली की सेंट्रल लैब भेजे। पूरे प्रकरण में मजिस्ट्रेटी के अलावा एसआईटी जांच भी चल रही है।
मिलावटी तेल प्रकरण का खुलासा होने को करीब 25 दिन हो चुके हैं। लेकिन सैंपल रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। 10 सितंबर को जब प्रशासन व पुलिस की टीम ने ऑयल डिपो से 71 हजार लीटर केरोसिन का अवैध स्टॉक पकड़ा तो फिर से तेल का मामला लखनऊ तक गूंजा। इस मामले में लखनऊ में बैठे उच्च अधिकारियों और शासन को इनपुट मिला है कि मिलावटी तेल प्रकरण लंबे समय से चल रहा है।
जिसमें अफसरों का भी संरक्षण रहता है। क्योंकि तेल कारोबारियों का कुछ अफसरों के यहां काफी आना-जाना बताया गया है। इस प्रकरण में अधिकारी चुप्पी साधे हैं। पूरा मामला शासन स्तर तक पहुंच चुका है। माना जा रहा है जल्द ही कुछ अधिकारियों पर इसकी गाज गिर सकती है।
अफसरों से लेकर नेताओं तक पकड़
मिलावटी तेल कारोबारियों की पकड़ कितनी मजबूत है। इसके कई उदाहरण कई बार सामने आ चुके हैं। जब 20 अगस्त को मिलावटी तेल का खुलासा हुआ तो थाने से लेकर लखनऊ तक फोन घनघना उठे। कई आला अधिकारियों के अलावा रिटायर्ड आला अधिकारियों ने भी तेल कारोबारियों के पक्ष में पैरवी को लेकर चर्चा रही।