एनजीटी की फटकार और कार्रवाई से बचने के लिए निगम अधिकारियों ने गांवड़ी के डंपिंग ग्राउंड पर जमे कूड़े के पहाड़ को हटाने के लिए 150 टन प्रतिदिन क्षमता की बैलेस्टिक सैपरेटर मशीन लगाई है। इसके बाद यहां कूड़ा न डालकर लोहिया नगर डंपिंग ग्राउंड पर डालकर यहां भी तीसरा कूड़े का पहाड़ खड़ा कर दिया है। दिल्ली रोड स्थित मंगतपुरम में पहले से ही एक बड़ा कूड़े का पहाड़ खड़ा है, जिसका आज तक निस्तारण नहीं किया जा सका है।
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पिछले दिनों सड़क मार्ग से मेरठ आए सीएम योगी आदित्यनाथ भी लोहिया नगर में कूड़े के पहाड़ को देखकर नाराज हुए थे। इसके बाद नगर निगम ने यहां व्यू कटर लगाने शुरू कर दिए हैं। इसके अलावा यहां 300 टन प्रतिदिन क्षमता की बैलेस्टिक सैपरेटर मशीन लगाने का भी प्रस्ताव पास हो चुका है। प्रदूषण विभाग की एनओसी नहीं मिलने के चलते इसकी स्थापना नहीं हो सकी।
दावे हैं, दावों का क्या...
निगम का दावा है कि गांवड़ी डंपिंग ग्राउंड पर 300-300 टन क्षमता की दो मशीनें लगाई जाएंगी। इसके बाद लोहिया नगर में कूड़ा भेजने के बजाय गांवड़ी में ही भेजा जाएगा। यहां लगे प्लांट कूड़े का निस्तारण कर देंगे। वहीं लोहिया नगर में भी प्लांट लगाकर कूड़े को खत्म किया जाएगा। प्लांट से निकलने वाला आरडीएफ भूड़बराल स्थित कूड़ा बिजली बनाने वाले प्लांट को बेचा जाएगा।
2021 में चौंकने वाले परिणाम दिखेंगे
कूड़ा निस्तारण के लिए तेजी से योजना बनाकर काम किया जा रहा है। नए साल में शहरवासियों को बेहद चौंकाने वाले परिणाम देखने को मिलेंगे। - मनीष बंसल, नगर आयुक्त
वायु प्रदूषण : योजनाएं ही बनी...क्रियान्वयन नहीं हुआ
लॉकडाउन के दौरान शहर की हवा जितनी स्वच्छ रही, उतनी तमाम प्रयासों के बाद नहीं हो सकी। वायु प्रदूषण रोकने के लिए 15 अक्तूबर से ग्रेप लागू किया लेकिन दीपावली तक हालात अधिक खराब हो गए। कई बार मेरठ वायु प्रदूषण के मामले में देश के चुनिंदा शहरों में शुमार हो गया। हवा की खराबी से मरीजों की सांसें हांफती रहीं।
दिवाली से पहले वायु प्रदूषण 450 से ऊपर पहुंच गया था, जो दिसंबर के आखिरी सप्ताह में 458 तक पहुंच गया। यह सामान्य से कई गुना ज्यादा है। दरअसल, वायु प्रदूषण के बारे में आदेश-निर्देश पर स्थानीय स्तर पर तालमेल ही नहीं है।
क्षेत्रीय प्रदूषण विभाग की टीम ने दिन-रात अभियान चलाने की बात कही। जिले में प्रतिबंधित ईंधन जलाने पर कोल्हू सील करने के अलावा कई औद्योगिक इकाइयों को बंद किया गया। वायु प्रदूषण कम न होने पर अधिकारी सफाई देते रहे कि जगह-जगह निर्माण कार्य और वाहनों की बढ़ती संख्या से प्रदूषण बढ़ रहा है।