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अलविदा 2020: निगम को बार-बार फटकार, जनता को नतीजों का इंतजार, योजनाएं ही बनींं क्रियान्वयन नहीं हुआ

Wed, 30 Dec 2020 03:41 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ नगर निगम - फोटो : अमर उजाला
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शहर के लोगों को कूड़े और प्रदूषण से निजात दिलाने के वायदों में एक और साल गुजर गया। परेशान लोगों ने इसे अपनी नियति मान लिया है। उनका सोचना है कि कागजी कार्रवाई से कुछ नहीं होने वाला। प्रशासनिक मशीनरी में जब तक दृढ़ इच्छा शक्ति और तालमेल का अभाव रहेगा, उन्होंने न तो साफ हवा मिलेगी और न ही बाहरी लोगों के सामने कूड़े के ढेरों से होने वाली आत्मग्लानि से राहत मिलेगी...

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राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण की फटकार के बाद भी नगर निगम शहर से निकलने वाले कूड़े  के निस्तारण के प्रबंध नहीं कर सका है। कागजी कार्रवाई में फंसे रहने से शहर के मुख्य प्रवेश द्वारों पर न केवल कूड़े के पहाड़ लगातार बढ़े होते जा रहे हैं।

हालांकि भूड़बराल में कूड़े से बिजली बनाने वाले प्लांट से थोड़ी उम्मीद जगी है। वहीं शहर से हर रोज निकलने वाले 900 टन कूड़े में से केवल 150 टन कूड़े  का ही निस्तारण हो पा रहा है। निगम बोर्ड के एजेंडे में यह समस्या सबसे ऊपर रही है लेकिन इसका समाधान नहीं हो पाया।

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एनजीटी की फटकार और कार्रवाई से बचने के लिए निगम अधिकारियों ने गांवड़ी के डंपिंग ग्राउंड पर जमे कूड़े के पहाड़ को हटाने के लिए 150 टन प्रतिदिन क्षमता की बैलेस्टिक सैपरेटर मशीन लगाई है। इसके बाद यहां कूड़ा न डालकर लोहिया नगर डंपिंग ग्राउंड पर डालकर यहां भी तीसरा कूड़े का पहाड़ खड़ा कर दिया है। दिल्ली रोड स्थित मंगतपुरम में पहले से ही एक बड़ा कूड़े का पहाड़ खड़ा है, जिसका आज तक निस्तारण नहीं किया जा सका है।

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पिछले दिनों सड़क मार्ग से मेरठ आए सीएम योगी आदित्यनाथ भी लोहिया नगर में कूड़े के पहाड़ को देखकर नाराज हुए थे। इसके बाद नगर निगम ने यहां व्यू कटर लगाने शुरू कर दिए हैं। इसके अलावा यहां 300 टन प्रतिदिन क्षमता की बैलेस्टिक सैपरेटर मशीन लगाने का भी प्रस्ताव पास हो चुका है। प्रदूषण विभाग की एनओसी नहीं मिलने के चलते इसकी स्थापना नहीं हो सकी।

दावे हैं, दावों का क्या...
निगम का दावा है कि गांवड़ी डंपिंग ग्राउंड पर 300-300 टन क्षमता की दो मशीनें लगाई जाएंगी। इसके बाद लोहिया नगर में कूड़ा भेजने के बजाय गांवड़ी में ही भेजा जाएगा। यहां लगे प्लांट कूड़े का निस्तारण कर देंगे। वहीं लोहिया नगर में भी प्लांट लगाकर कूड़े को खत्म किया जाएगा। प्लांट से निकलने वाला आरडीएफ भूड़बराल स्थित कूड़ा बिजली बनाने वाले प्लांट को बेचा जाएगा।
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2021 में चौंकने वाले परिणाम दिखेंगे
कूड़ा निस्तारण के लिए तेजी से योजना बनाकर काम किया जा रहा है। नए साल में शहरवासियों को बेहद चौंकाने वाले परिणाम देखने को मिलेंगे। - मनीष बंसल, नगर आयुक्त

वायु प्रदूषण : योजनाएं ही बनी...क्रियान्वयन नहीं हुआ   
लॉकडाउन के दौरान शहर की हवा जितनी स्वच्छ रही, उतनी तमाम प्रयासों के बाद नहीं हो सकी। वायु प्रदूषण रोकने के लिए 15 अक्तूबर से ग्रेप लागू किया लेकिन दीपावली तक हालात अधिक खराब हो गए। कई बार मेरठ वायु प्रदूषण के मामले में देश के चुनिंदा शहरों में शुमार हो गया। हवा की खराबी से मरीजों की सांसें हांफती रहीं।

दिवाली से पहले वायु प्रदूषण 450 से ऊपर पहुंच गया था, जो दिसंबर के आखिरी सप्ताह में 458 तक पहुंच गया। यह सामान्य से कई गुना ज्यादा है। दरअसल, वायु प्रदूषण के बारे में आदेश-निर्देश पर स्थानीय स्तर पर तालमेल ही नहीं है।

क्षेत्रीय प्रदूषण विभाग की टीम ने दिन-रात अभियान चलाने की बात कही। जिले में प्रतिबंधित ईंधन जलाने पर कोल्हू सील करने के अलावा कई औद्योगिक इकाइयों को बंद किया गया। वायु प्रदूषण कम न होने पर अधिकारी सफाई देते रहे कि जगह-जगह निर्माण कार्य और वाहनों की बढ़ती संख्या से प्रदूषण बढ़ रहा है।
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