22 फरवरी 2018 को लखनऊ में हुई इन्वेस्टर्स समिट में उद्यमियों ने क्रांतिधरा को 800 करोड़ के निवेश का शगुन दिया। सीएम ने जिले की खेल उपकरण निर्माता इकाइयों को एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत आसान ऋण, योजनाओं में छूट व सब्सिडी का तोहफा दिया। एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) व इन्वेस्टर्स समिट, इन्वेस्टर्स ब्रेकिंग सेरेमनी के कारण जिले के उद्योगों को विकास की नई रफ्तार मिली। मेरठ में दो नए औद्योगिक क्षेत्रों को बसाने का प्रस्ताव पास हुआ। सालों से बंद पड़ी परतापुर कताई मिल की 90 एकड़ भूमि पर नया औद्योगिक क्षेत्र बसाने का प्रस्ताव तैयार हुआ। इसका असर यह हुआ कि मेट्रो कैश एंड कैरी ने मेरठ में अपना स्टोर खोलकर रोजगार की नई राहे खोल दीं। जिससे सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिला।
नोटबंदी और जीएसटी की मार से बेहाल रही इंडस्ट्री को साल 2018 ने तरक्की की संजीवनी दी। देश के साथ विदेश में भी मेरठ के प्रोडक्ट की मांग बढ़ी। खासकर खेल उत्पादों की विदेशों में डिमांड और बढ़ी। मेरठ की कैंची की डिमांड देश में इस साल भी खूब रही। क्रिकेट के सामान की मांग सबसे ज्यादा रही। इस साल भी कई विदेशी खिलाड़ी शहर में क्रिकेट का सामान खरीदने आए। इससे उत्पादों की विश्वसनीयता भी बढ़ी।
एशिया की विशाल सोना मंडी, 2018 में रही ठंडी
सोना कारोबारियों के लिए साल 2018 बेहद निराशाजनक रहा। धनतेरस, अक्षय तृतीया, नवरात्र और सायों में भी सोना मंडी ग्राहकों से खाली रही। उम्मीद से कम ग्राहक की सर्राफा बाजार पहुंचे। पहले नोटबंदी और जीएसटी ने सराफा कारोबारियो ंको परेशान किया। बजट में सोने की खरीद पर पक्का बिल अवश्य देने, पेन कार्ड लगाने के नियम के चलते ग्राहक कम पहुंचे। सोना कारोबारियों के अनुसार लोग बिना रसीद के सोना खरीदना चाहते हैं। बड़ा ग्राहक कभी रसीद लेना नहीं चाहता, लेकिन जब पक्के बिल का नियम आ गया तो निवेश वाला ग्राहक बाजार से दूर हो गया। छोटे ग्राहक ही बाजार में पहुंचे। इसके अलावा सोने की कीमतों ने 2018 में पिछले 13 सालों के रिकार्ड तोड़ दिए। कीमतें 31 हजार से कम नहीं रहीं, इसलिए एशिया की सबसे बड़ी सोना मंडी 2018 में ठंडी ही रही।
आईपीएल में मेरठी बल्लों ने उगली आग, कई बने रिकॉर्ड
मेरठी बल्लों ने साल 2018 में घरेलू ही नहीं अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में रनों के नए रिकाॅर्ड खड़े किए। क्रिकेट के सबसे बड़े मुकाबले आईपीएल में सभी टीमों के दर्जनों खिलाड़ियों के हाथ में मेरठ की बल्ला निर्माता कंपनियों के बल्ले थे। 2018 की आईपीएल विजेता टीम चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाड़ियों ने एसएफ के बल्लों से मुकाबला जीता। मेरठ में एसएफ, एसएम, एसजी, एसएस, बीडीएम बल्ला निर्माता प्रमुख कंपनियां हैं। जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में बल्ला निर्यात करती हैं। सभी कंपनियों के बल्ले, गेंद, हेलमेट व अन्य सामान बड़े मैचों मे गए। विदेशी खिलाड़ी बल्ले खरीदने मेरठ भी आए। कंपनियों ने बल्लों की तकनीक में परिवर्तन किया और रनों के नए रिकॉर्ड बनने शुरू हुए। जिसका असर क्रिकेट दर्शकों ने साफ तौर पर देखा गया। इसे खिलाड़ियों ने सराहा।
मेरठ का कैंची उद्योग विदेश तक प्रसिद्ध है। यहां की कैंची केन्या, कजाकिस्तान, घाना, रूस समेत करीब 50 से अधिक देशों में निर्यात की जाती है। एक जमाना था जब मेरठ की कैंचियों का व्यापार 50 करोड़ से ऊपर का सालाना कारोबार करता था पर अब यह कारोबार सिमट रहा है। इसका कारण है कि चीन का कैंची कारोबार में बढ़ता हस्तक्षेप। हालांकि सरकारी स्तर पर अब इस उद्योग को और ज्यादा मदद की बात कही जा रही है।
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