मेरठ क्षेत्र में बड़ौत डिपो, गढमुक्तेश्वर डिपो, सोहराबगेट डिपो, मेरठ डिपो व भैंसाली डिपो आता है। मेरठ डिपो में 125 बसें चलती हैं। इनमें बड़ौत डिपो में 62, गढमुक्तेश्वर डिपो में 85, सोहराबगेट डिपो में लगभग 130 बसें रोडवेज की चलती हैं। यानी लगभग 402 बसें संचालित है।
भैंसाली डिपो में अनुबंधित बसें संचालित हैं। अब यदि क्षेत्रीय कार्यशाला की बात करें तो करीब 50 बसें टायरों की कमी से खड़ी हैं। बड़ौत डिपो में टायरों की कोई कमी नहीं है। यहां लगभग 20 बसों में हर महीने नए टायर बदले जा रहे हैं। अब मामला उजागर हुआ तो विभागीय अफसरों में हड़कंप मच गया। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराकर कार्रवाई की बात कही है।
एक माह में 20 बसों के बदले गए 160 टायर
बड़ौत डिपो में संचालित बस नंबर यूपी 15बीटी 2980 में आठ टायर, यूपी 81बीटी 6560 में आठ टायर, यूपी 30एटी 2605 में आठ टायर, यूपी 30 एटी 2588 में सात टायर, यूपी 81बीटी 7091 में सात टायर, यूपी 21बीएन 3604 में नौ टायर, यूपी 38एफटी 8702 में आठ टायरों सहित अन्य बसों में मात्र 15 हजार किलोमीटर दूरी तय करने पर टायर बदले गए हैं।
यानी इन 20 बसों में 11 माह के अंदर लगभग 160 टायर बदले गए हैं। कुल 1.60 करोड़ किलोमीटर दूरी तय करते, लेकिन इन टायरों को मात्र 24 लाख किलोमीटर दूरी तय करने पर ही बदल दिया गया। रोडवेज बस के एक टायर की कीमत की बात करें तो लगभग 18 हजार रुपये में एक टायर आता है। ऐसे में 20 बसों में 11 माह के अंदर लगभग 29 लाख रुपये के टायर बदल दिए गए।
ये बोले एआरएम
मामला गंभीर है, हाल ही में पकड़ में आया है, जिसकी गहनता से जांच कराई जा रही है। कुछ बसों में तय दूरी से पहले ही टायर बदलना पाया गया है। जांच पूरी होने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी -रामदास, एआरएम बड़ौत।