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परमात्मा, जीवात्मा और प्रकृति अनादि सत्य : राजेश सेठी

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- परमात्मा देता है जीव के कर्मों का फल
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- आर्य समाज थापरनगर में हुआ सत्संग
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर में रविवारीय सत्संग हुआ। इसमें अध्यक्ष राजेश सेठी ने कहा कि महर्षि स्वामी दयानंद का अनुमोदित एवं प्रचारित त्रैतवाद का सिद्धांत ही वेद एवं उपनिषद द्वारा प्रमाणित है। संसार में परमात्मा, जीवात्मा एवं प्रकृति तीनों शाश्वत एवं अनादि सत्य हैं। परमात्मा ने मूल प्रकृति से जीवात्माओं के कल्याण के लिए इस संसार का निर्माण किया है।
राजेश सेठी ने कहा कि यह संसार परिवर्तनशील है। इसके समस्त व्यवहार पुण्य, धर्म, ईश्वर उपासना आदि तभी सार्थक होते हैं, जब यह सब व्यवहार सत्य है। आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत को मानने पर उपासक और उपास्य का भेद मिट जाता है। हमारे समस्त सांसारिक व्यवहार निरुद्देश्य हो जाते हैं। उपनिषदों में भी परमात्मा एवं जीवात्मा को समान धर्मी प्रकृति रूपी वृक्ष में बैठे हुए दो पक्षियों के समान माना गया है। जीवात्मा संसार का भोग प्राप्त करता है। परमात्मा साक्षी रूप में देखता है और कर्मों का फल देता है।
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सेठी ने कहा कि अनेक मत परमात्मा की सत्ता को भी नहीं मानते। केवल प्रकृति की सत्ता पर ही विश्वास करते हैं। यह भी उचित नहीं है। परमात्मा के अतिरिक्त इस संसार के निर्माण की क्षमता किसी भी शक्ति में नहीं है। इसलिए परमात्मा की उपासना करनी चाहिए। प्रीति सेठी, विदुला सोनी, ऋचा सेठी, सुमन आनंद और धर्मवीर ने भजन प्रस्तुत किए।
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इस दौरान आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। यजमान मयंक जिंदल, श्रेय बत्रा रहे। कार्यक्रम में करुणा सागर बाली, सुनीता, धर्म वीर, भानु बत्रा, कृष्ण कुमार वर्मा, आशीष सेठी, अजय प्रेमी, राकेश ओबराय सहित अन्य मौजूद रहे।
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