अलग-अलग बैंक शाखा से करेंसी बदलने की व्यवस्था तो थी। लेकिन एक व्यक्ति बैंक शाखा से एक से ज्यादा बार करेंसी नहीं बदल सकता था। बावजूद इसके लोगों ने एक ही शाखा से कई बार करेंसी बदली। कारण रहा है कि उसे रोकने कोई इंतजाम नहीं था। ऐसे में बैंक कर्मियों ने मांग की कि चुनाव में प्रयोग की जाने वाली अमिट स्याही दी जाए और हर नोट बदलने वाले की अंगुली पर लगाई जाए, ताकि वह दोबारा आता हुए कम से कम झिझके तो सही।
बैंकों में वेरीफिकेशन का इंतजाम यह था कि नोट बदलने वाले आए आवेदक से फार्म भरवाकर उसके साथ लगे आईडी प्रूफ को चेक किया जाता। देखा जाता कि आवेदक सही है। फिर उसकी एंट्री रजिस्टर में होती। फिर नोट बदले जाते। यदि वही व्यक्ति तीन घंटे बाद दोबारा आवेदन करे तो फिर वही प्रक्रिया और नोट वापस हो जाते। रजिस्टर में मिलान नहीं हो रहा था। दरअसल काम का बोझ ज्यादा था। इसका लोगों ने खूब फायदा उठाया। बैंक कर्मियाें का कहना था कि इसका इलाज अमिट स्याही से हो सकता है।