लोलिता, आउच जैसे संवादों से हिंदी फिल्मों में अपनी धाक जमाने वाले शक्ति कपूर रविवार को मेरठ के मेहमान बने। उन्होंने कॉमेडी के गिरते स्तर के लिए लेखकों को जिम्मेदार ठहराया। अमर उजाला से उन्होंने खुलकर बात की। अपनी निजी जिंदगी पर भी चर्चा की।
उन्होंने कहा कि फिल्मों ने मेरी छवि चाहे जितना बिगाड़ी हो, लेकिन असल में लड़कियां मुझसे कभी नहीं डरीं। नोट बंदी के फैसले का भी स्वागत किया। उन्होंने बताया कि मैं भी मुंबई में बैंक की लाइन में लगकर पैसा लेने गया था, लेकिन मैनेजर ने मुझे अंदर बुलाकर चेंज पैसे दिए। उन्होंने बताया कि जब मैं इंडस्ट्री में आया तब जो भी रोल मुझे मिला मैंने वो किया। लेकिन जब विलेन का रोल बहुत कर लिया तो चेंज के लिए कॉमेडी शुरू की। दर्शकों को कॉमेडी पसंद आई और मैं कामयाब भी हो गया। महमूद और किशोर कुमार को बेहतरीन कॉमेडियन मानता हूं।
कादर खान जैसे कलाकार नहीं रहे
फिल्मों में कॉमेडी और हास्य संवादों का स्तर इसलिए गिरा है, क्योंकि अब वो लेखक नहीं रहे। कादर खान साहब जब कॉमेडी डॉयलाग्स लिखते थे, लोग लोटपोट हो जाते थे। अब घटिया संवाद ही कॉमेडी का हिस्सा बन गए हैं। लोग उसे ही हंसी मान रहे हैं। गोलमाल, राजाबाबू, अंदाज अपना अपना जैसी कॉमेडी फिल्में इसलिए आज भी लोग देखना पसंद करते हैं।
मेरा सपना था बेटी बने साइंटिस्ट
बकौल शक्ति, मैं नहीं चाहता था मेरी बेटी श्रद्धा कभी भी फिल्मों में आए। मैंने उसे बोस्टन पढ़ने भेजा। हमेशा उसे फिल्मों से दूर रखा। मैं उसे साइंटिस्ट बनाना चाहता था। 40 लाख रुपये उसकी फीस भरता था। छुट्टियों में वो घर आई, वो इतनी सुंदर है कि उसे हिंदुजा से फिल्म तीन पत्ती का ऑफर मिला। वो खुद को रोक नहीं पाई और हीरोइन बन गई। अपने बेटे को भी मैं फिल्मों से दूर रखना चाहता हूं।
बेटी की खातिर किया बिगबॉस
बकौल शक्ति, मैंने डांसिंग शो किए। अच्छा डांस कहीं से सीखा नहीं, बल्कि हर इंसान में एक डांसिंग स्किल होती है, जिसे पहचानने की जरूरत होती है। बिगबॉस के घर में कुछ भी स्क्रिप्टड नहीं होता। मैं बिग बॉस में अपनी बेटी के लिए गया। मैं हमेशा काम से लौटकर दो पैक लगाकर सो जाता था। बेटी इसे गलत बताती थी। अपनी इसी आदत को छोड़ने के लिए मैं बिगबॉस के घर में गया।