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घोड़े तो तैयार, नहीं हैं घुड़सवार  

Sat, 28 Apr 2018 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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घोड़े को अगर दौड़ाना बंद कर दिया जाए तो वह धीरे-धीरे बेकार हो जाता है। ऐसे में घोड़ों को उनके घुड़सवार रोजाना दौड़ाते हैं। लेकिन पुलिस विभाग में हाल जुदा है। यहां घोड़े तो हैं। लेकिन उनको दौड़ाने के लिए घुड़सवार पूरी संख्या में नहीं हैं। पुलिस लाइन में इस वक्त बीस घोड़े हैं। मगर घुड़सवार सिर्फ सात। ऐसे में इनको दौड़ाने वाले नहीं मिल रहे और ये घोड़े बंधे-बंधे बीमार हो रहे हैं। 
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पुलिस के हमराही ये अश्व
अंग्रेजों के जमाने से पुलिस विभाग में घोड़े पाले जा रहे हैं। शहर में रोजाना गश्त हो, कोई मेला, बड़ा आयोजन या फिर वीआईपी कार्यक्रम में घुड़सवार पुलिस का दस्ता तैनात रहता है। इन घोड़ों को पुलिस विभाग का सदस्य माना जाता है। उसी तरह से उनको ट्रेनिंग दी जाती है। इनकी देखरेख के लिए पुलिस लाइन में घुड़साल बनी है। लेकिन आलम यह है कि ये घोड़े अपनी पीड़ा बता नहीं पाते हैं, इसलिए इनकी इस हालत पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।  

दो अप्रैल की हिंसा ने खींचा ध्यान
शहर में नियमित गश्त के अलावा इन घोड़ों की बलवा, उपद्रव या हिंसात्मक घटनाओं में भी जरूरत पड़ती है। बीती दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान शहर में हिंसा हुई थी तो पुलिस अफसरों को भीड़ पर काबू पाने के लिए घुड़सवार दस्ते की याद आई। लेकिन अफसरों को बताया गया कि पुलिस लाइन में घोड़े तो तैयार बंधे हैं। मगर घुड़सवार पूरे नहीं हैं। 
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माउंटेड पुलिस की स्थिति
पुलिस लाइन स्थित माउंटेड पुलिस (घुड़सवार पुलिस) के प्रभारी एचसीपी कन्हैया प्रसाद हैं। इनके अलावा एक हेड कांस्टेबल और पांच कांस्टेबल ही यहां तैनात हैं। इनमें भी तीन कांस्टेबलों की ड्यूटी गारद में रहती है। यहां वर्तमान में अश्वों की संख्या 20 है। ऐसे में तीन या चार पुलिसकर्मी ही घुड़सवारी के लिए हैं। जबकि 20 घोड़ों को दौड़ाने के लिए इतने ही पुलिसकर्मी की जरूरत है। ऐसे में अधिकतर घोड़े रोजाना दौड़ नहीं पा रहे हैं

ये है इनकी खुराक 
प्रभारी कन्हैयालाल के अनुसार प्रत्येक घोड़े को एक दिन में एक किलो चना, एक किलो जौ और एक किलो गेहूं का चोकर दिया जाता है। जबकि 15 किग्रा सूखी घास दी जाती है। जब हरी घास आ जाती है तो उसे बढ़ाकर 25 किलो कर दिया जाता है। 
आईपीएस रमित शर्मा ने बचायी थी जान 
मेरठ में डीआईजी रेंज रहे आईपीएस अधिकारी रमित शर्मा ने इस अश्वशाला की दशा सुधारने का प्रयास किया था। उन्होंने घोड़ों को बेहतर खुराक देने और घुड़सवार दस्ते को रोजाना शहर में गश्त करने के निर्देश दिए थे। इस दौरान उनके पास एक फाइल आई थी, जिसमें एक घोड़े को बीमारी के चलते बेकार होना बताते हुए उसे गोली मारने की अनुमति मांगी गई थी। लेकिन आईपीएस रमित शर्मा ने साफ कहा था कि घोड़ा पुलिस परिवार का सदस्य है। इसे मारा नहीं जाएगा बल्कि इसकी सही देखभाल और इलाज कराया जाएगा।
हो रही पूरी देखरेख
घुड़सवार पुलिस में लखनऊ से ही पुलिसकर्मियों की तैनाती होती है। जिला पुलिस से तैनाती नहीं की जा सकती है। जो घोड़े पुलिस लाइन में हैं पुलिस उनकी पूरी देखरेख कर रही है। -मंजिल सैनी, एसएसपी 
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