मेरठ। फ्लोर मिलें मुनाफा कमाने के लिए पैकिंग में भी घटतौली कर रही हैं। आटा, सूजी और मैदा के 50 किलो के कट्टे में 400 ग्राम से लेकर एक किलोग्राम तक की घटतौली कर हर माह पांच लाख रुपये से ज्यादा बचा रहे हैं। शहर में सर्वाधिक गड़बड़ी आटे की बोरियों में की जा रही है।
शहर में लंबे समय से बाट माप तौल विभाग के अधिकारियों द्वारा चेकिंग नहीं की गई है। आम जनता भी इस संबंध में कई बार प्रशासन से शिकायत कर चुकी है। फ्रेश आटा, सूजी, मैदा की पैक बोरी में माल कम होने पर व्यापारी आटा झड़ गया कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। ऐसे में ग्राहक ठगा सा महसूस करते हैं। रिटेलर कंपनी की पैकिंग बोलकर ग्राहक को अपने विश्वास में ले लेता है। इस का सीधा मुनाफा पैकिंग करने वाली मिल को जाता है। अब विधिक माप विज्ञान विभाग सोमवार से शहर की फ्लोर मिलों के साथ रिटेल व थोक की कंपनियों के आटा, मैदा, सूजी के कट्टों का वजन कराएगा। घटतौली पाई जाने पर संबंधित पैकिंग कंपनी के खिलाफ कार्रवाई होगी।
सिर्फ आटे में ही 1.5 लाख की घटतौली
शहर में मिलों के साथ दुकानों पर भी कांटे खराब हैं, जिसके चलते कुछ फ्लोर मिलो में पैकिंग के दौरान 50 किलो के कट्टे में 49 किलो से 49.5 किलो के बीच ही आटा भरकर घटतौली की जाती है। कई बड़ी मिल रोजाना 2400 बोरी तक आटा तैयार करतीं हैं। एक बोरी पर आधा किलो आटा भी बचा लिया तो रोजाना 5 बोरी आटे की घटतौली हो जाती है। माह भर में आंकड़ा 150 बोरी हो जाता है। 50 किलो की एक बोरी की कीमत 1050 रुपये हैं। मिल मालिकों को सिर्फ आटे में 1.57 लाख तक की सीधी बचत हो जाती है। इसके अतिरिक्त मैदा, सूजी और अन्य खाद्य पदार्थों में भी घटतौली की जाती है।
विभाग करेगा कार्रवाई
विभाग द्वारा समय-समय पर घटतौली की जांच की जाती है। विभाग ने कई जगहों पर कार्रवाई भी की है। आटा, मैदा, सूजी की बोरियों की घटतौली के संबंध में सोमवार से जांच अभियान शुरू होगा। - आरके विक्रम, वरिष्ठ निरीक्षक, विधिक माप विज्ञान