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शुगर मिल के महाप्रबंधक बोले, अधिकारियों में भय का माहौल, 21 ने दिया इस्तीफा

Wed, 11 Oct 2017 04:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ शामली
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जांच करने पहुंची टीम - फोटो : अमर उजाला
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शामली शुगर मिल के महाप्रबंधक (केन) डॉक्टर कुलदीप पिलानिया ने बुधवार को प्रेसवार्ता कर अपना दावा पेश किया। पिलानिया ने बताया कि मिल में कहीं से भी गैस रिसाव नहीं हुआ। साथ ही उन्होंने कहा एफआईआर दर्ज होने से मिल अधिकारियों और कर्मचारियों में भय का माहौल है। कहा अब तक 21 अधिकारी इस्तीफा दे चुके है, हालांकि इस्तीफे अभी मंजूर नहीं हुए हैं। 
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गैस रिसाव प्रकरण की जांच करने मुजफ्फरनगर से विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम शामली पहुंची। इस दौरान टीम ने शुगर मिल के बायो गैस प्लांट में निरीक्षण किया। प्लांट से गांव खेडीकरमू वाले मार्ग पर सड़क पर पड़े केमिकल का नमूना भी भरा।

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गैस रिसाव से बीमार हुए बच्चे - फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में मंगलवार सुबह सैकड़ों बच्चों की हालत बिगड़ गई थी। अचानक बच्चों ने गले और सीने में जलन तथा उल्टी आने की शिकायत की और चीख पुकार मच गई। 110 बच्चों को शामली सीएचसी लाकर उपचार कराया गया था। काफी बच्चों को अभिभावक अपने साथ ले गए थे। हादसे के पीछे सर शादीलाल शुगर मिल की डिस्टलरी यूनिट के बायो गैस प्लांट से गैस रिसाव होने की आशंका जताई जा रही है। शासन तक मामला पहुंचने पर जिला प्रशासन हरकत में आ गया। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम ने बायो गैस प्लांट पर पहुंचकर गैस उत्पादन की एक मशीन पर सील लगा दी थी और मामले में जांच प्रारंभ कर दी थी।

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हादसा मंगलवार सुबह नौ बजे हुआ
हादसा मंगलवार सुबह करीब नौ बजे हुआ था। शामली के पास के गांव खेड़ीकरमू, लिलौन और बलवा के काफी बच्चे बुढ़ाना रोड स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ते हैं। इन तीनों गांवों का संपर्क मार्ग सर शादीलाल शुगर मिल की डिस्टलरी यूनिट के बायो गैस प्लांट के पास से गुजरता है। वहां से बच्चे पैदल, साइकिल और अन्य वाहनों से आते हैं। इसी संपर्क मार्ग से गुजरने के दौरान बच्चे केमिकल और गैस रिसाव जैसी तीक्ष्ण गंध का शिकार हो गए थे। स्कूल में पहुंचने पर बच्चों की हालत बिगड़ती चली गई तथा बच्चों को उल्टी लगने लगी थी। बच्चों ने सीने और गले में जलन की शिकायत की, जिससे स्कूल स्टाफ में भी हड़कंप मच गया था। एकाएक बड़ी संख्या में बच्चे यही शिकायत करने लगे, जिसके बाद स्कूल स्टाफ ने बच्चों को स्कूल वाहनों से शामली सीएचसी पहुंचाना शुरु किया था। कुछ ही देर में अस्पताल में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती गई, जिससे अस्पताल स्टाफ के भी हाथ पांव फूल गए थे। सामाजिक लोगों ने भी अस्पताल पहुंचकर बच्चों को उपचार दिलाने में सहयोग किया था। सीएचसी से जिन बच्चों की हालत में सुधार नहीं हुआ, उन्हें एंबुलेंस और अन्य वाहनों से प्राइवेट अस्पतालों में भिजवाया गया था।

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