सरकारी विभाग एक-दूसरे पर पासा फेंकने में माहिर हैं। अधिकारियों की आंखों के सामने इमारतें बनकर खड़ी हो जाती हैं लेकिन वसूली के चक्कर में नोटिस-दर-नोटिस का खेल चलता रहता है। मेरठ के शास्त्री नगर, माधवपुरम और मंगलपांडे नगर में ऐसे कई मामले हैं।
हालात ऐसे है कि माधवपुरम का आवासीय इलाका तो धीरे-धीरे औद्योगिक क्षेत्र में तब्दील होने जा रहा है। वहीं, ताजा मामला तेजगढ़ी चौराहे पर बन रही तीन मंजिला इमारत का है। यहां नोटिस देने के बाद भी कोई कार्रवाई न तो आवास विकास परिषद ने की और न ही मेडिकल थाना पुलिस ने इस बारे में दी गई एफआईआर दर्ज की।
आरटीआई में हुए खुलासे के बाद मेडिकल पुलिस एक महीने बाद बुधवार को तेजगढ़ी स्थित इमारत में कार्य रुकवाने की औपचारिकता पूरी करने पहुंची। आवास विकास परिषद की तरफ से 29 सितंबर को थानाध्यक्ष मेडिकल को कार्य रुकवाने के लिए पत्र लिखा गया था। पुलिस इस पत्र को ही दबाए बैठे रही। बुुधवार को खबर छपने के बाद पुलिस ने पहुंचकर कार्य रुकवाया। हालांकि बाद में यहां काम दोबारा शुरू हो गया।